
सभी मृतक बोड़गा गांव के रहने वाले थे। इनमें एक मां उसके 2 बच्चे और बच्चों के दादा जी शामिल है। बच्चों के पिता मजदूरी करने आंध्र प्रदेश गए थे, उन्हें इस घटना की जानकारी भी नहीं थी। बता दें कि घटना के 18 घंटे बाद मां-बेटे की लाश रेस्क्यू टीम ने खोज निकाला था। घटना के 48 घंटे बाद दादा और पोते की लाश बाहर निकाली गई।
500 मीटर दूर मिला शव
मृतकों में सभी इंद्रावती नदी पार स्थित बोड़गा गांव के रहने वाले थे। मां पोदिया और उनका बेटा राकेश का शव दो दिन पहले एक-दूसरे से तौलिये से बंधे मिले था।
सुनीता कवासी का शव घटना स्थल से 500 मीटर दूर नदी किनारे मिला था। राकेश के दादा और पोदिया के ससुर भादो पिता मद्दा का शव भी आज घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर झाड़ियों से लटका हुआ मिला।
पिता मजदूरी करने आंध्र में है, संपर्क नहीं
मृतक राकेश के पिता और पोदिया के पति सन्नू मजदूरी करने आंध्र प्रदेश गए हुए हैं। उनसे अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उनके परिवार के तीन सदस्य नदी में डूबकर अपनी जान गंवा चुके हैं।
हर साल कई हादसे होते है
इंद्रावती नदी के किनारे स्थित घाटों से आवागमन का एकमात्र साधन डोंगी है। इस डोंगी से अब तक सैकड़ों लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। अधिकतर हादसे बारिश के दिनों में बाढ़ के दौरान यात्रा करते समय हुए हैं।
यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित होने के कारण विकास से वंचित रहा है। हालांकि, अब अबूझमाड़ से लगा यह इलाका नक्सल मुक्त होने की दिशा में अग्रसर है।