राष्ट्रीय पक्षी मोर के गुपचुप दाह संस्कार पर उठे सवाल, संजय नेताम ने की निष्पक्ष जांँच की मांग

Chhattisgarh Crimes

पूरन मेश्राम/गरियाबंद। जिले के उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व क्षेत्र में भारत के राष्ट्रीय पक्षी भारतीय मोर का शव मिलने के बाद वन विभाग द्वारा कथित रूप से गुपचुप तरीके से दाह संस्कार किए जाने का मामला सामने आया है। जिस पर जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

संजय नेताम ने कहा कि राष्ट्रीय पक्षी के मामले में वन विभाग को पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करनी चाहिए थी,लेकिन जिस तरह जल्दबाजी में दाह संस्कार किया गया,उससे पूरे मामले पर संदेह गहरा गया है।

*मोर के शव के साथ असंवेदनशीलता*

अखबार के माध्यम से जानकारी मिला कि वन विभाग के अधिकारियों द्वारा मोर के शव को बिना किसी सम्मान के साथ बिस्किट बाक्स मे डालकर शासकीय वाहन में मैनपुर लाया गया जो वन्य जीवों के प्रति असंवेदनशील और राष्ट्रीय पक्षी का अपमान है।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले इसी क्षेत्र में वन विभाग के एक SDO के पुत्र को सरकारी वाहन में लकड़ी ले जाते हुए पकड़े जाने का मामला सामने आया था, लेकिन इस मामले में आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

नेताम ने कहा कि जब कोई गरीब ग्रामीण जंगल से लकड़ी का छोटा सा टुकड़ा भी ले जाता है तो उसकी गाड़ी तक राजसात कर दी जाती है और लोगों को जेल भेज दिया जाता है। कई बार वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के साथ कठोरता और मारपीट की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कानून केवल आम नागरिकों के लिए है.? क्या अधिकारियों और उनके परिजनों पर कानून लागू नहीं होता।

इस पूरे मामले को लेकर नेताम ने कहा कानून अगर सच में कानून है तो सब पर बराबर होना चाहिए,वरना जंगल के नाम पर न्याय का ये खेल बंद होना चाहिए।उन्होंने आगे कहा जब गरीब की लकड़ी पर कानून की तलवार चल जाती है,तो अफसरों के दरवाज़े पर कानून क्यों खामोश हो जाती है। नेताम ने मांग किया है कि राष्ट्रीय पक्षी मोर के मामले और लकड़ी तस्करी प्रकरण दोनों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।