बड़ा सवाल,क्या अब सुदूर वनांँचल के गांँवो का होगा विकास

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*बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा गांँव चिपरी*

पूरन मेश्राम/मैनपुर। केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा सुदूर वनांँचल के गांँवो को मूलभूत बुनियादी सुविधा दिलाने के लिए कृत संकल्पित होने के बावजूद भी अंतिम पंक्ति के गांँवो का दशा और दिशा में बदलाव क्यों नहीं आ रहा?यह एक बड़ा सवाल है। आजादी के बाद से आज तक ऐसे गांँव विकास से कोसों दूर क्यों होने लगा है। इसमें कहां और किसका लापरवाही है या फिर सिस्टम की लाचारी इसे समझना तो बड़ा मुश्किल लगने लगता है।

वैसे तो गरियाबंद जिला के सुदूर वनांँचल गांँवो को अति संवेदनशील माना जाता था अब वैसा स्थिति भी नहीं है तो क्या विकास गांँव तक पहुंँचेगी यह बड़ा सवाल है?

*हम बताने जा रहे हैं 1922 से पहले का बसाहट गांँव के हकीकत*

गरियाबंद जिला के विकासखंड मैनपुर से 35 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ ग्राम पंचायत कोकड़ी के आश्रित ग्राम चिपरी जहां मकान संख्या 53 और जनसंख्या लगभग 295 के आसपास है,वहांँ के जानकार बताते हैं,चिपरी गांँव का बसाहट मिसल रिकार्ड के अनुसार 19 22 के आसपास है। नदी नालों को पार कर बरसात मे गांव पहुंँचा जाता है। बरसात के दिनों में ग्रामीणो का आवाजाही बिल्कुल बंद हो जाता है। बच्चों के स्कूल जाने, सोसायटी से चावल लाने खेती किसानी के लिए खाद बीज सहित ब्लॉक मुख्यालय से बिल्कुल गांँव कट सा जाता है। क्योंकि बारिश के पानी नाला के ऊपर ऊफान मे रहता है। पुलिया बनाने के मांग ग्रामीणों ने कई बार किया लेकिन आज भी मामला जस के तस है।

*पक्की सड़क निर्माण 2016 से अधूरा*

गांँव की युवा सरपंच बिसरु राम मरकाम ने बताया कि 7 किलोमीटर तक मुख्य सड़क से खरथा बेड़ा गांँव तक पक्की सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग के द्वारा 2015 से शुरूआत किया गया था। मुरूम डालकर सड़क बनाई गई है। जिनका स्वीकृति 9 करोड़ 53 लाख 64हजार होने की बावजूद आज तक पक्की सड़क नहीं बन पाई ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग इसमें रोकथाम लगाया हुआ है।

*श्रमदान से बनाया गया वैकल्पिक स्कूल 2022 से बंद*

चिपरी गांँव से जहां पर प्राथमिक स्कूल है उस गांव की दूरी 3 से 4 किलोमीटर होगा लेकिन यहाँ प्राथमिक शाला में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगभग 32 से 35 तक होने पर एसआरटीसी और एनआरटीसी विद्यालय का संचालन 2014 से शुरूआत किया गया था। जहां बच्चों को मध्यान्ह भोजन पढ़ाई एवं सारी सुविधाएं प्राप्त होती थी ग्रामीणों के द्वारा श्रमदान करके 2019 में स्कूल भवन का निर्माण भी किया गया था लेकिन अचानक 2022 में बंद होने से स्कूली बच्चों को बाहर पढ़ने के लिए भयंकर परेशानी होने लगी।

कारण बरसात में आने जाने में परेशानी के अलावा जंगल झाड़ी वाला इलाका छोटे बच्चों के लिए नामुमकिन होने लगा उसके बावजूद भी मजबूरी में बच्चे बाहर पढ़ने जाने लगे फिर भी लगभग 7 से 8 बच्चे चाह कर भी बाहर पढ़ाई करने नहीं जा पाए जिसके कारण बीच में ही पढ़ाई उनको छोड़ना पड़ गई।

*आंगनबाड़ी भवन में आहाता निर्माण की कमी*

सुव्यवस्थित आंगनवाड़ी भवन का अभाव एवं अहाता निर्माण के कमी से बच्चों को आए दिन परेशानी उठानी पड़ती है।

*सामुदायिक वन संसाधन पट्टा के लिए दावा एसडीएम ऑफिस में 2 साल से अटका*

व्यक्तिगत वन अधिकार के बजाय ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जंगल को बचाने के लिए सामुदायिक वन संसाधन पट्टा का मांँग किया गया था विधि सम्मत दावा फॉर्म जमा किया हुआ एसडीएम ऑफिस मैनपुर में एक साल हो गया लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो पाया जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।

*जल जीवन मिशन के लिए बनाया गया पानी टंकी बना शो पीस*

जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांँव के सभी घरों में शुद्ध पेयजल पहुंँचाने के लिए यह मुहिम सरकार द्वारा चलाई जा रही है। जिसके लिए लाखों रुपए खर्च किया जाना है। उसमें से मात्र 2 साल में पानी टंकी बनकर तैयार हुआ आधा अधूरा पाइपलाइन ठेकेदार के द्वारा बिछाई गई है। जिसके कारण से आज भी लोगों को इसका लाभ रत्ती भर भी नहीं मिल पा रहा है। ग्राम चिपरी के मुखिया शिकारी राम मरकाम,सखाराम,जगदेव मरकाम, देवी सिंह मरकाम, बृजलाल सोरी,श्यामलाल सोरी, सुकनाथ परदे, विश्राम मरकाम ग्राम पटेल, कूनोरम मरकाम, मगन्तीन बाई,ललिता मंडावी, फूलवती मरकाम, सविता मरकाम, अघन बाई परदे, सुनीता सोरी सहित ग्रामीणों ने गांव के मूलभूत बुनियादी समस्याओं के निराकरण के लिए जिला के कलेक्टर एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों से पहल करने का मांँग किया है।