बिलासपुर में बच्चों और अभिभावकों को सीबीएसई कोर्स के नाम पर भ्रमित करने वाले ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की गई है। केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के निर्देश पर शिक्षा विभाग की कमेटी ने जांच के बाद यह अभमित जिला शिक्षा अधिकारी को दी है। दरअसल, कक्षा 5वीं और 8वीं में खुद को सीबीएसई से मान्यता प्राप्त बताने वाले ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल (मिशन अस्पताल रोड, व्यापार विहार) और नारायण ई-टेक्नो स्कूल (अमेरी रोड) के खिलाफ अभिभावकों ने मोर्चा खोल दिया था। ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल की शहर में 3 ब्रांच संचालित हैं। इसमें बहतराई के साथ ही मिशन अस्पताल रोड, व्यापार विहार शामिल हैं। व्यापार विहार और मिशन स्कूल रोड में संचालित स्कूलों में 5वीं और 8वीं का होम एग्जाम हो चुके हैं। इस बीच राज्य सरकार ने 5वीं और 8वीं में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के तहत बोर्ड परीक्षा लेने का आदेश जारी किया।
स्कूल प्रबंधन ने इस आदेश की जानकारी देते हुए अभिभावकों को बच्चों को परीक्षा दिलाने भेजने कहा। अभिभावकों का कहना था कि स्कूल प्रबंधन ने एक दिन पहले बोर्ड परीक्षा होने की जानकारी दी। उनके बच्चे परीक्षा दिला चुके हैं, ऐसे में सिर्फ एक दिन पहले सूचना देकर बोर्ड परीक्षा कैसे ली जा सकती है? बच्चों को तैयारी का समय भी नहीं मिला।
कलेक्टर ने खड़े किए हाथ, केंद्रीय राज्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने एग्जाम से पहले हाथ खड़े कर दिए, उनका कहना था कि वो इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। अभिभावकों को एडमिशन के समय यह सब देखना चाहिए। इससे परेशान होकर अभिभावकों ने केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू से मुलाकात स्कूल प्रबंधन की शिकायत की। इस दौरान अभिभावकों ने अपनी समस्याएं बताई और अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। केंद्रीय राज्यमंत्री ने मुख्य सचिव विकासशील को पत्र लिखा। इसमें उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर केस की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने को कहा है। दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
सीबीएसई कोर्स की पढ़ाई, एग्जाम भी लिया
जांच कमेटी ने ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल व्यापार बिहार और मिशन हास्पिटल रोड़ स्थित स्कूल में पढ़ने वाले अभिभावकों का बयान लिया, जिसमें उन्होंने बताया कि स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यमं में अध्ययन अध्यापन के नाम से विद्यालय द्वारा निर्धारित फीस अब तक जमा की जाती रही है।
साथ ही अध्ययन-अध्यापन भी सीबीएसई कोर्स का कराया गया। लेकिन, अब छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक के आधार पर कक्षा 5वीं और 8 वीं के विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा दिलाने के लिए दबाव बनाया गया। जबकि, पूर्व में स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों की परीक्षा ले ली थी।