गरियाबंद में किडनी बीमारी का बढ़ता खतरा

Chhattisgarh Crimes

लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद… सुपेबेड़ा के बाद अब पथर्री गांव बना चिंता का केंद्र

गरियाबंद जिले से एक बार फिर चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पहले से ही किडनी बीमारी के लिए चर्चित सुपेबेड़ा गांव के बाद अब पथर्री गांव एक नए किडनी प्रभावित क्षेत्र के रूप में उभरता नजर आ रहा है। यह गांव फिंगेश्वर क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां ग्रामीणों में बीमारी को लेकर गहरी चिंता और दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों के अनुसार, पथर्री गांव में वर्तमान में करीब 10 लोग किडनी संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते 2 से 3 वर्षों के भीतर इस बीमारी के कारण लगभग 7 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बढ़ते मामलों ने गांव को एक नए ‘किडनी प्रभावित गांव’ के रूप में पहचान दिलानी शुरू कर दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में पीने के पानी की गुणवत्ता इस समस्या की बड़ी वजह हो सकती है। प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में भी कुछ स्थानों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर मुद्दे पर प्रशासन अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहा है।

गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और समय पर इलाज न मिलने के कारण लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। ग्रामीण लगातार प्रशासन से स्वास्थ्य शिविर लगाने, पानी की नियमित जांच कराने और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। सुपेबेड़ा गांव की तरह पथर्री में भी स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है, जिससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश भी बढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और प्रभावित ग्रामीणों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाता है।

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