
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मंगलवार देर शाम अचानक मौसम बदल गया और शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में 91 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आई आंधी आफत बनकर टूट पड़ी। इसके चलते जगह-जगह पेड़ गिर गए। चौक-चौराहों पर लगे होर्डिंग्स, फ्लैक्स और बैनर उखड़कर बिजली तारों और सड़कों पर आ गए। आंधी और पेड़ों के गिरने से कई बिजली पोल भी टूट गए, जिससे शहर से लेकर गांव तक ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। नगर निगम का अमला पूरी रात जेसीबी मशीनों की मदद से पेड़ और मलबा हटाने में जुटा रहा। बिजली गुल होने के कारण लोगों को पूरी रात अंधेरे में गुजारनी पड़ी। मरम्मत कार्य के बाद ही बिजली आपूर्ति बहाल हो सकेगी, ऐसे में कई इलाकों में बुधवार को ही बिजली आने की संभावना है। वहीं शहरी क्षेत्र के ईई पी. श्रीनिवास राजू ने कहा कि बिजली आपूर्ति कब तक सुचारू हो पाएगी, यह कहना अभी मुश्किल है। मंगलवार शाम करीब 6:30 बजे अचानक मौसम बदल गया और देखते ही देखते शहर सहित आसपास के इलाकों में 49 नॉट यानी लगभग 91 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से हवाएं चलने लगीं। इससे पहले 2014 में आए हुदहुद चक्रवात के दौरान करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थीं।
मौसम वैज्ञानिक बीआर चिन्धालोरे ने बताया कि वर्तमान में वायुमंडल के अलग-अलग स्तरों पर तीन शक्तिशाली सिनोप्टिक सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं, जो इस रिकॉर्ड तोड़ हवा की गति के मुख्य कारण बने। पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण और मध्य प्रदेश से बिहार तक छत्तीसगढ़ के ऊपर से गुजर रही द्रोणिका ने मिलकर वातावरण में भारी अस्थिरता पैदा की।
इन प्रणालियों के आपस में मिलने से वायुदाब में अचानक भारी गिरावट आई, जिसे भरने के लिए ऊपरी वायुमंडल की ठंडी हवाएं डाउनड्राफ्ट के रूप में तेजी से जमीन की ओर झपटीं। इसी वजह से शाम 6:30 बजे हवा की सामान्य गति अचानक बढ़कर 49 नॉट (91 किमी/घंटा) तक पहुंच गई