
पूरन मेश्राम/मैनपुर।विकासखंड मुख्यालय मैनपुर मे 25 मई को नक्सलबाड़ी के किसानों का महान संघर्ष को याद करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित किया गया, कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए युवराज नेताम सचिव भाकपा माले रेड स्टार ने कहा कि 25 मई 1967 को फूट पड़ा ऐतिहासिक नक्सलबाड़ी किसान विद्रोह भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन और वर्ग संघर्षों के इतिहास में एक युगांतर कारी मोड़ था। नक्सलबाड़ी विद्रोह का सबसे बड़ा ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व यह है कि इसने कम्युनिस्ट आंदोलन के भीतर छिपे संशोधनवाद, वर्ग-सहयोग और चुनावी अवसर वाद की कलई को पूरी तरह उतार फेंका। इस जुझारू किसान उभार ने स्थापित कम्युनिस्टों के भीतर एक वैचारिक और क्रांतिकारी पुनरुत्थान की जमीन तैयार की, जिसकी तार्किक परिणति 1969 में भाकपा (माले) के ऐतिहासिक गठन के रूप में हुई।यह सच है कि बाद के दौर में इस महान आंदोलन को कई संकीर्णतावादी, दुस्साहसवादी और अवसरवादी भटकावों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण नक्सलबाड़ी का क्रांतिकारी नारा और इसके उद्देश्य अधूरे रह गए। आज भी कम्युनिस्ट आंदोलन को उन भटकावों से मुक्त होकर सही वर्ग-दिशा में आगे बढ़ने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।दमनकारी शासक वर्ग,कॉरपोरेट लुटेरे और उनके राजनीतिक औजार फ़ासीवादी संघ परिवार अपनी पूरी बर्बरता के बावजूद भी भारत के नक्शे से महान नक्सलबाड़ी की विरासत को मिटा नहीं सकते। नक्सलबाड़ी आज भी देश के कोने-कोने में जल-जंगल-जमीन की लूट, कॉरपोरेट-फाँसीवादी दमन और वर्ग-शोषण के खिलाफ लड़ रहे मेहनतकशों, आदिवासियों, दलितों और उत्पीड़ितों के लिए प्रेरणा का सबसे प्रखर स्रोत है।
भीमसेन मरकाम और पुरुषोत्तम साय ने भी इस ऐतिहासिक अवसर पर नक्सलबाड़ी के अमर शहीदों को अपनी गहरी वैचारिक और क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए फाँसीवाद और कॉरपोरेट लूट के खिलाफ जन-प्रतिरोध तेज करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में भीमसेन मरकाम,युवराज नेताम,पुरषोत्तम साय परमेश्वर मरकाम,राकेश मरकाम,पदम लाल, नेताम,सुमित्रानेताम,खेलेन्द्री नेताम सहित क्षेत्र भर के भाकपा माले रेड स्टार के साथियों ने भाग लिया।