
इस नई रेल लाइन के बनने से नवा रायपुर की रायगढ़, राजनांदगांव और दूसरे इंडस्ट्रियल एरिया से सीधी रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे माल ढुलाई आसान होगी और इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिलेगा। 154 हेक्टेयर में फैली है परियोजना
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मुदित भटनागर के मुताबिक पूरी परियोजना करीब 154 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। पहले चरण में रायपुर जिले के अंदर करीब 12.95 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी।
रेलवे की ओर से जारी नोटिफिकेशन में मंदिर हसौद इलाके के धमनी, गुजरा, गनौद, रींवा, टेकारी, नारा, डिघारी और खौली समेत कई गांवों को शामिल किया गया है। इन गांवों के प्रभावित जमीन मालिकों से तय समय के भीतर दावा और आपत्ति देने को कहा गया है।
पीएम मोदी ने 2025 में दी थी मंजूरी
इस रेल परियोजना को केंद्र सरकार ने भी प्राथमिकता वाली योजना में रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में देश की चार मल्टी ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिसमें यह प्रोजेक्ट भी शामिल था।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक लाइन शुरू होने के बाद रायपुर और आसपास के इंडस्ट्रियल एरिया के लिए माल ट्रांसपोर्ट का नया विकल्प तैयार होगा। इसका फायदा बलौदाबाजार और आसपास के सीमेंट प्लांट, स्टील यूनिट और दूसरे उद्योगों को भी मिलेगा। 5वीं और 6वीं लाइन के तौर पर होगा डेवलपमेंट
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक नवा रायपुर-खरसिया-परमालकसा रेल परियोजना को पांचवीं और छठवीं लाइन के तौर पर डेवलप किया जाएगा। इससे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के व्यस्त रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा और नई राजधानी क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी पहले से ज्यादा मजबूत होगी।
फिलहाल नवा रायपुर को राजिम रेल कॉरिडोर से जोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है। वहीं अब रायगढ़ की दिशा में नई रेल लाइन बनने से राजधानी क्षेत्र के विस्तार को भी रफ्तार मिलने की उम्मीद है।