छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सांसारिक जीवन छोड़कर संयम का मार्ग चुनने वाली मुमुक्षु गुन कावड़ को धूमधाम से विदाई दी गई

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सांसारिक जीवन छोड़कर संयम का मार्ग चुनने वाली मुमुक्षु गुन कावड़ को धूमधाम से विदाई दी गई। विदाई से पहले दिन भर धार्मिक आयोजन हुए। इसके बाद शाम को मुमुक्षु राजस्थान के लिए निकलीं। 9 अगस्त को राजस्थान में मुमुक्षु गुन कावड़ दीक्षा लेंगी।

शहर से विदा लेते हुए मुमुक्षु बहन गुन कावड़ ने अपनी जन्मभूमि को नमन किया। बनिया पारा से निकलकर शहर के सिद्धेश्वर महाकालेश्वर मंदिर होते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

वहां से वे स्थानक भवन पहुंचीं और फिर रायपुर होते हुए राजस्थान के लिए रवाना हो गईं। दीक्षा के बाद वे साध्वी के रूप में नए नाम के साथ लौटेंगी।

अपनी जन्मभूमि का छोड़कर त्याग मार्ग चुना

धमतरी शहर की दीक्षार्थी गुन कवाड़ अपनी जन्मभूमि को नमन कर त्याग के मार्ग पर निकल पड़ी हैं। परिवार जनों ने मुमुक्षु दीक्षार्थी को अंतिम सांसारिक विदाई दी।

धर्म की तपोभूमि के धार्मिक इतिहास में 9 अगस्त को एक और पवित्र अध्याय जुड़ जाएगा। इस दिन नगर की बेटी गुन कवाड़ सांसारिक दुनिया को त्याग कर संयम के मार्ग का अनुसरण करेंगी।

समाज के कल्याण की दी सीख

विदाई के अवसर पर मुमुक्षु बहन ने कहा कि समाज में व्यक्ति को एक-दूसरे को जोड़ने का धर्म निभाना चाहिए, न कि तोड़ने या छोड़ने का। तभी समाज का कल्याण संभव है।

उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में त्याग, तपस्या और समर्पण की परंपरा सर्वाधिक सार्थक रास्ता है, जिसकी व्याख्या श्रीमद्भागवत गीता भी करती है।

बच्चों को धर्म से जोड़ने का आग्रह

मुमुक्षु गुन कावड़ ने माता-पिता से बच्चों को धर्म से जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर बच्चे धर्म से जुड़ेंगे तो उनमें संस्कार अपने आप आ जाएंगे। माता-पिता को ऐसा आदर्श पेश करना चाहिए जिससे बच्चे सही मार्ग पर चलें।

अंत में उन्होंने कहा कि वह धमतरी की बेटी हैं और अगर उन्होंने जाने-अनजाने में किसी का हृदय दुखाया हो तो वे अंतर हृदय से क्षमा याचना मांगती हैं