
यह आत्मसमर्पण जिला सुकमा पुलिस और आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू (ASR) जिला पुलिस के संयुक्त प्रयासों से पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत हुआ। इन नक्सलियों ने बस्तर रेंज के IG सुंदरराज पी., सुकमा SP किरण चव्हाण, ASR (AP) के OSD पंकज मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह और कोंटा रेंज CRPF के 2IC अरविंद पी. आनंद की मौजूदगी में सरेंडर किया।
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पित माओवादी किस्टाराम और गोलापल्ली LOS से जुड़े हुए थे। इनमें एक ACM रैंक का कमांडर भी शामिल है। सभी माओवादी 8 आपराधिक मामलों में आरोपी हैं, जिनसे पूछताछ जारी है। ये सभी नक्सली अपने साथ इंसास, SLR, 303 जैसे हथियार साथ लेकर आए हैं।
इन्होंने किया सरेंडर
सोढ़ी जोगा – ACM – 5 लाख रुपए इनामी
डाबरा गंगा – LOS – 1 लाख रुपए इनामी
सोढ़ी राजे – LOS – 1 लाख रुपए इनामी
माड़वी बुधरी – LOS – 1 लाख रुपए इनामी
सुरक्षा कैंप और विकास से टूटा माओवादियों का नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि, किस्टाराम और गोलापल्ली क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़क कनेक्टिविटी में विस्तार और लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों से माओवादियों का स्वतंत्र विचरण क्षेत्र समाप्त हो गया है। इसके चलते संगठन के भीतर असंतोष और मोहभंग तेजी से बढ़ा है।
वहीं शासन की विकास योजनाओं और प्रशासन की सीधी पहुंच से ग्रामीणों का भरोसा मजबूत हुआ है। जिससे माओवादी संगठन का प्रभाव कमजोर पड़ा है। पुलिस का दावा है कि संगठन अब अंतिम चरण में है।
शासन की पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ
आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, पुनर्वास और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सामान्य जीवन जी सकें।
पुलिस की अपील
सुकमा SP किरण चव्हाण ने कहा कि शेष बचे माओवादी भी हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करें और शासन की पुनर्वास योजना का लाभ लें। वहीं बस्तर IG सुंदरराज पी. ने कहा कि हिंसा में केवल विनाश है, जबकि ‘पूना मारगेम’ अभियान विकास और सम्मान का रास्ता खोलता है।