
मुलाकात के बाद बैज ने कहा कि कवासी लखमा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हैं। उन्होंने कहा, हमें पूरा भरोसा है कि फरवरी में कोर्ट उन्हें ज़मानत दे देगा। बाहर आने के बाद लखमा बस्तर और पूरे प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करेंगे।
बैज ने यह भी कहा कि आदिवासी नेता को टारगेट करके जेल भेजा गया और यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई। इसके खिलाफ पूरे प्रदेश में आवाज़ उठाई जाएगी। जेल में कवासी लखमा का स्वास्थ्य पहले ठीक नहीं था, लेकिन अब उनकी सेहत बेहतर है।
बैज ने बताया कि 23 फरवरी से बजट सत्र शुरू हो रहा है। पिछले एक साल से लखमा विधानसभा नहीं जा पाए हैं। वे सत्र में जाकर क्षेत्र के मुद्दों और सवालों को उठाना चाहते हैं। इसीलिए न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें बजट सत्र में जाने का मौका दिया जाना चाहिए।
कुछ महीने पहले ही कवासी लखमा का आंखों का ऑपरेशन हुआ था। कवासी लखमा बस्तर अंचल के सबसे मजबूत और प्रभावशाली आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। साल 2013 के दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो चमत्कारिक रूप से जीवित बचे।
2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद उन्हें आबकारी मंत्री बनाया गया। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 13 मंत्रियों में से केवल चार ही अपनी सीट बचा पाए थे, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल हैं।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला ?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है। ED ने इस मामले में एसीबी में FIR दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का दावा किया गया है। FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल बताए गए हैं।
ED के अनुसार, तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।