
यह कार्रवाई सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में की गई। इससे पहले 30 जनवरी 2026 को उड़नदस्ता टीम ने गोदरमाना (झारखंड) निवासी अनूप गुप्ता और बतौली (सरगुजा) निवासी विनय गुप्ता को पकड़ा था। उनके कब्जे से 1200 नशीले इंजेक्शन जब्त किए गए थे, जिनकी अनुमानित कीमत 6 लाख रुपए थी। दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया था।
पूछताछ के दौरान आरोपी अनूप गुप्ता ने खुलासा किया कि वह ये नशीले इंजेक्शन गढ़वा जिले के रंजीत विश्वकर्मा से खरीदता था। उसके पार्टनर्स मंजूर अंसारी और प्रमोद कुमार सप्लाई का काम करते थे। इस खुलासे के बाद सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने सरगुजा डीआईजी राजेश अग्रवाल से साइबर सेल की सहायता मांगी।
रामानुजगंज से नशीले इंजेक्शन के साथ आरोपी गिरफ्तार
साइबर सेल की मदद से तीनों आरोपियों के मोबाइल लोकेशन को ट्रेस किया गया। इसके बाद 31 जनवरी 2026 की शाम पलटन घाट, रामानुजगंज से रंजीत विश्वकर्मा, मंजूर अंसारी और प्रमोद कुमार को एक साथ 1500 नशीले इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। जब्त किए गए इंजेक्शनों की बाजार कीमत लगभग 7.50 लाख रुपये आंकी गई है।
इन तीनों आरोपियों को अनूप गुप्ता और विनय गुप्ता के मामले में भी गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(सी) और 29 के तहत अलग से प्रकरण दर्ज कर कोर्ट रामानुजगंज में पेश किया गया और रिमांड पर लिया गया है।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने बताया कि यह एक बड़ी कार्रवाई है। रंजीत विश्वकर्मा गढ़वा जिले का सबसे बड़ा नशीले इंजेक्शन सप्लायर माना जाता था। उसकी गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ में इस अवैध कारोबार पर लगभग 50 प्रतिशत तक रोक लगने की संभावना है।
उन्होंने साइबर सेल सरगुजा के अजीत मिश्रा, भोजराज पासवान और उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। रंजीत गुप्ता ने कहा कि साइबर सेल के सहयोग के बिना 24 घंटे के भीतर इतनी बड़ी कार्रवाई संभव नहीं थी।