कांकेर जिले के चारामा विकासखंड के ग्राम टंहाकापार स्थित महानदी तट के प्राचीन टांकेश्वर महादेव घाट पर माघी पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी

Chhattisgarh Crimesकांकेर जिले के चारामा विकासखंड के ग्राम टंहाकापार स्थित महानदी तट के प्राचीन टांकेश्वर महादेव घाट पर माघी पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दूर-दराज के गांवों से सैकड़ों भक्त यहां पहुंचे और महानदी में पवित्र स्नान कर भगवान टांकेश्वर महादेव के शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

सुबह से ही घाट क्षेत्र में भक्तों का तांता लगा रहा। पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार और धार्मिक उल्लास से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने महानदी में स्नान के बाद भगवान शिव से सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।

माघी पूर्णिमा पर लगभग 30 से 35 किलोमीटर दूर के क्षेत्रों से श्रद्धालु टांकेश्वर महादेव तट पर पहुंचे। इस अवसर पर आसपास के गांवों के देवी-देवताओं को भी पारंपरिक रूप से यहां लाया गया, जिससे धार्मिक आस्था और अधिक गहरी हुई।

प्राचीन इतिहास और आस्था का केंद्र

स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, टांकेश्वर महादेव का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग और नंदी स्वयं धारा से प्रकट हुए थे। कांकेर रियासत काल में भी राजा-महाराजा यहां दर्शन और पूजा के लिए आते थे। यह स्थल आज भी शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

चारामा क्षेत्र का ऐतिहासिक घाट और आवागमन का प्रमुख मार्ग

पूर्व में यह घाट चारामा क्षेत्र, हल्बा, गीतपहर और महानदी के उस पार के क्षेत्रों को जोड़ने वाला एकमात्र प्रमुख मार्ग था। पुल के अभाव में लोग नाव से आवागमन करते थे। वर्तमान में टांकेश्वर महादेव घाट से बासनवाही के बीच पुल निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे भविष्य में श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

आदिवासी समाज से जुड़ाव और पारंपरिक धार्मिक आयोजन

टांकेश्वर महादेव घाट का आदिवासी समाज से भी गहरा जुड़ाव है। यहां ध्रुव गोंड समाज का जिला कार्यालय स्थित है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां पारंपरिक मेला भी लगता है, जिसमें सैकड़ों जोड़े विवाह बंधन में बंधते हैं। माघी पूर्णिमा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर इस घाट की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को उजागर किया।

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