
ACB-EOW में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, कोयला घोटाले के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी का ड्राइवर नारायण साहू उसका सबसे भरोसेमंद सहयोगी और सिंडिकेट का मुख्य कैश हैंडलर था। एसीबी की जांच में पता चला कि उसने कोयला सिंडिकेट की ओर से करीब 13 करोड़ रुपए की अवैध नगदी इकट्ठा की थी।
सूर्यकांत तिवारी के निर्देश पर इसमें से करीब 7.5 करोड़ रुपए अलग-अलग रसूखदार अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचाए थे। आयकर विभाग की डायरियों में भी नारायण से प्राप्त नगद और नारायण को दिया गया नगद जैसी कई एंट्री मिली हैं, जो इस अवैध नेटवर्क में उसकी सक्रिय भूमिका की पुष्टि करती है।
FIR में नाम नहीं, मालिक के आदेश का पालन किया
इस मामले में एसीबी उसकी तलाश कर रही है और आरोपी पिछले दो सालों से फरार है। गिरफ्तारी की आशंका से बचने के लिए उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसके वकील ने दलील दी कि वह केवल ड्राइवर था, एफआईआर में उसका नाम नहीं है और अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि आरोपी दो साल से फरार है, उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी है और उसने जांच में कोई सहयोग नहीं किया। सभी तथ्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत साक्ष्य मौजूद हैं और समानता का सिद्धांत इस मामले में लागू नहीं होता। इसके चलते अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
रायगढ़, कोरबा और सूरजपुर में कोयला कारोबार से जुड़े ट्रांसपोर्टरों से प्रति टन 25 रुपए की अवैध वसूली का मामला सामने आया था। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच इस सिंडिकेट ने करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध लेवी वसूली की।
इस मामले में आईएएस अधिकारियों, राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों समेत कई लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किए गए हैं। कोयला घोटाले का मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी फिलहाल जेल में है, जबकि उसका ड्राइवर नारायण साहू अब भी फरार है।