केंद्र सरकार के लागू किए जा रहे चार नए श्रम कानूनों के विरोध में दुर्ग-भिलाई औद्योगिक क्षेत्र के मजदूर संगठनों ने आज श्रम आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इन कानूनों को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मजदूर शामिल हुए, जिन्होंने इसे मजदूर हितों पर सीधा हमला बताया। मजदूर नेता कलादास डहरिया ने इन कानूनों को पूंजीपतियों के पक्ष में बताते हुए कहा कि ये मजदूरों के हितों को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे। उन्होंने कार्य अवधि को लेकर चिंता जताई।
डहरिया ने बताया कि पहले से ही 8 घंटे की कार्य अवधि कानूनी रूप से तय है, लेकिन कई कंपनियों में मजदूरों से 12 से 14 घंटे तक काम लिया जाता है, जबकि वेतन में कोई वृद्धि नहीं होती। उन्होंने आशंका जताई कि 12 घंटे की कानूनी कार्य अवधि लागू होने पर मजदूरों से 16-17 घंटे तक काम लिया जा सकता है, जिससे उनका शोषण बढ़ेगा।
बड़े पैमाने पर छंटनी का खतरा
कलादास डहरिया ने 300 से कम मजदूरों वाली कंपनियों को मिलने वाली छूट पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पहले 50 मजदूरों वाली कंपनी में किसी कर्मचारी को हटाने के लिए श्रम आयुक्त को नोटिस देना अनिवार्य था। नए कानून के तहत, 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों को बिना सरकारी हस्तक्षेप के मजदूरों को निकालने की खुली छूट मिल जाएगी।
डहरिया के अनुसार, इससे छोटे उद्योगों में, जहां 50 या 100 मजदूर काम करते हैं, बड़े पैमाने पर छंटनी का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून मालिकों और ठेकेदारों को मनमानी करने का लाइसेंस देता है।
पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप
डहरिया ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा पूरी तरह पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की है। उन्होंने कहा कि सरकार को पूंजीपतियों से फायदा मिलता है, मजदूरों से नहीं, इसलिए मजदूरों की हालत और बदतर बनाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, ये कानून मजदूर वर्ग को गुलामी की ओर धकेलने वाले हैं।
मजदूर संगठनों ने मांग की कि चारों श्रम कानून तुरंत वापस लिए जाएं। उनका कहना है कि यदि सरकार ने आवाज नहीं सुनी, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। श्रम आयुक्त विकास सरोदे ने बताया कि नए श्रम कानूनों को लेकर श्रमिकों में विरोध था, जिसे लेकर उन्होंने ज्ञापन सौंपा है।