
जानकारी के मुताबिक, एसीबी की टीम ने 29 दिसंबर 2007 को कृषि विभाग के तत्कालीन सर्वेयर राकेश रमण सिंह के मिशन चौक स्थित निवास पर छापा मारा था। संपत्ति की जांच में सर्वेयर के पास 3 करोड़ 22 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति का आंकलन किया गया था।
पदस्थापना से कार्रवाई दिवस तक उनकी आय एक करोड़ 12 लाख 90 हजार रुपए थी। आय से करीब तीन गुणा संपत्ति मिलने पर एसीबी ने राकेश रमण सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(ई) सहपठित धारा 13(2) के व आईपीसी की धारा 468, 471, 201 के तहत अपराध दर्ज किया था।
19 साल बाद फैसला, रिटायर हो चुके हैं सर्वेयर
कोर्ट और एसीबी के अनुसार आरोपी राकेश रमन सिंह साल 1988 से कृषि विभाग अंबिकापुर में सर्वेयर के पद कार्यरत थे। उसके आय के ज्ञात और वैध स्रोत से प्राप्त आय की तुलना में अर्जित संपत्ति 2,09,51,724 रुपए अधिक थी।
आरोपी ने अपनी अवैध आय को छिपाने के आशय से छापा दिनांक के बाद कूटरचित केपिटल एकाउंट और बैलेंस शीट तैयार कर उन्हें फर्जी होना जानते हुए छल के आशय से अलग-अलग प्रपत्र के रूप में प्रस्तुत कर अपने अपराध का साक्ष्य छिपाया था।
इस मामले में विशेष न्यायाधीश ममता पटेल की अदालत ने करीब 17 साल बाद फैसला सुनाया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में राकेश रमण सिंह को 3 साल और आईपीसी की धारा 468, 471 व 201 के तहत 3 साल और 11 हजार रुपए की अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। आरोपी राकेश रमण सिंह सर्वेयर पद से रिटायर हो चुके हैं।