वेलेनटाईन डे मे खास जोडी़ की खास पेशकश

Chhattisgarh Crimes
पूरन मेश्राम/गरियाबंद।
आज 14 फरवरी वेलेनटाईन डे है और इस दिन के लिए एक प्यारा सा संदेश जंगल से निकलकर सामने आई है –
प्यार मे वो ताकत है कि कईयों मुसीबत आये एक साथ डटकर सामना करने से हर बड़ी परेशानी और मुसीबत दूर हो जाती है।
बस हमसफर का हाथ न छूटना पाये यह बात हमे पूर्व नक्सली रहे सुनील उर्फ जगतार सिंह और अरेना उर्फ सगरो टेकाम ने अपनी नक्सल जीवन के वाक्यों को याद कर कही। उदंती एरिया कमेटी के खूंखार कमांडर हरियाणा के रहने वाले सुनील उर्फ जगतार ने अपनी पत्नी अरेना उर्फ सगरो समेत कुल 7 नक्सलियों के सहित हथियारो के साथ सरेंडर कर दिया। तब उस समय छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में नक्सलवाद को बड़ा झटका लगा था।
डिवीजन कमेटी सदस्य एवं उदंती एरिया कमेटी का इंचार्ज रहे सुनील उर्फ जगतार ने अपनी पत्नी अरेना उर्फ सगरो जो उदंती सीतानदी एरिया कमेटी की सचिव थी जिनके साथ कई आपरेशन को अंजाम दिया और लगातार पार्टी के आवाज को उठाते हुए जनता की हर समस्या को सामने लाते रहे इन सब आपरेशन मे दोनो साथ साथ रहे एक दूसरे का पूरा ख्याल रखते और कही कुछ हो जाने पर एक दूसरे के लिए चिंतित हो जाते लगातार बड़े आपरेशन को अंजाम देने के बाद इन्होने एक दूसरे के साथ जिन्दगी भर साथी बनकर रहने की कसम खाई और 7 नवंबर 2025 को गरियाबंद में हथियार डाल दिया आज एक दूसरे का साथ पाकर दोनो बेहद खुश है। दोनो ने बताया कि वे 15 से 20 ऑपरेशन मे शामिल रहे है वह सिर्फ एक दूसरे के प्यार की बदौलत। आपको यह बता दूं कि भालुडिग्गी मटाल के पहाड़ियों मे जब एक करोड़ का इनामी नक्सली चलपति मारा गया था तब अरेना ने ही बाकी घायल साथियों को मुठभेड़ स्थल से अकेले अपने दम पर बाहर निकाला था तब उस समय 16 नक्सली मारे गये थे। आईए जानते है इन्ही की अनकही प्रेम गाथा जो शहर की चकाचौंध से दूर पवित्र प्रेमगाथा जो जंगलो मे एक दूसरे का साथ नही छोड़ने के वादा के साथ पनपी और शादी के बाद पूरा हुई। हम बताने जा रहे है पूर्व नक्सली सुनील उर्फ जगतार सिंह जो नक्सल संगठन मे वर्ष 2004 मे आये और लगातार अपने संगठन का आवाज बुलंद करते रहे फिर वर्ष 2016 मे इन्हे सीनापाली एरिया कमेटी सदस्य बनाया गया वहीं रहते रहते सुनील को नक्सल संगठन के अरेना उर्फ सगरो से प्यार हो गया संगठन मे रहते हुए भी दोनो मिल नही पाते बस दूर से एक दूसरे को देखकर खुश रहना इनके आदत मे सुमार हो गया था अरेना दुर्गकोंदल की रहने वाली है जो 2006 से संगठन मे जुड़ी हुई थी संगठन मे रहते रहते दोनो के बीच प्यार हुआ प्यार ऐसा की बिछड़ने की बात से दोनो परेशान हो जाते थे दोनो बताते है कि पत्तो मे लिखकर प्रेम संदेश एक दूसरे को देते थे प्यार मे बंदिश न हो ऐसा हो नही सकता जिसमे संगठन के कड़े नियमो के चलते एक दूसरे को देखकर तसल्ली देना पड़ जाता था ईश्क मुश्क छुपाये नही छुपता जब संगठन को पता चला तो दोनो को दूर करने की पूरी कोशिश हुई लेकिन दोनो के नक्सल संगठन के प्रति लगाव को देखकर संगठन ने 1 जनवरी 2018 को एक दूसरे के साथ रीति रीवाज के अनुसार शादी करवा दी गई जिसमें दोनो ने शपथ लेकर एक दूसरे का हाथ थामा और जिन्दगी भर साथ रहने की कमस खाई। इसके बाद दोनो की जिन्दगी ने करवट बदली और नेतृत्व हीन होते संगठन को छोड़कर आम जनता के बीच जनता की समस्या को सामने लाने की कसम खाई फिर तीन महिना बाद 7 नवंबर 2025 को दोनो ने मिलकर सरेण्डर कर दिया।