छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व से लगे वन विकास निगम ग्रामीण इलाकों के जंगल में बाघिन और उसके दो शावकों के घूमने से लोग दहशत में हैं। बाघिन ने एक मवेशी का शिकार भी किया है। हालांकि, वन विभाग के अफसरों का कहना है कि, प्रत्यक्ष रूप से अब तक बाघिन नहीं दिखी है। लेकिन, मवेशी पर किए गए शिकार का तरीका बाघिन की तरह ही है।
ऐसे में अब वन विभाग का अमला अलर्ट हो गया है। एटीआर प्रबंधन ने जिन इलाकों में बाघिन की मौजूदगी है, वहां ट्रैप कैमरे लगाए हैं। जिससे उसके विचरण की स्थिति का पता लगाया जा सके। कैमरे में बाघिन और शावकों के तस्वीर आने की पूरी उम्मीद है।
बाघिन और दो शावक के इस क्षेत्र में विचरण करने की जानकारी पिछले एक सप्ताह से मिल रही है। उनके पंजों के निशान दिखे हैं। लेकिन, अभी तक किसी ने उन्हें प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि, टाइगर रिजर्व एरिया से बाघिन शावकों के साथ कैसे बाहर आ गई। इस स्थिति में बाघिन और शावकों की सुरक्षा ज्यादा जरूरी है।
वहीं, बाघिन के रिहायशी क्षेत्र में पहुंचना आम लोगों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। एटीआर प्रबंधन, वन विकास निगम और बिलासपुर वनमंडल की टीम निगरानी करने में जुटा है। एटीआर प्रबंधन ने तो स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के सदस्यों को केवल इसी कार्य में लगा दिया है। उनकी तलाशी के बीच पटैता बैरियर से करीब एक किमी दूर मवेशी का शिकार हुआ है।
हरकत में आए अफसरों ने जारी किया अलर्ट
वन विभाग ने मैदानी अमले को अलर्ट कर दिया है। अधिकारी-कर्मचारी रविवार को आनन-फानन में मौके पर पहुंचे। सूचना सही निकला, जंगल के पास एक मवेशी मृत पड़ा था। जिस तरह उसका शिकार हुआ है, उससे लग भी रहा है कि बाघिन ने उस पर हमला किया है। जिसके बाद एटीआर प्रबंधन ने इस इलाके में ट्रैप कैमरा लगा दिया है।
जाल तो नहीं बिछाया, कर रहे जांच
टाइगर रिजर्व से बाहर बाघिन की मौजूदगी की वजह से वन विभाग की चिंता बढ़ी हुई है। चिंता उनकी सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि गांव के करीब जंगल की सीमा पर जंगली सूअर के शिकारी सक्रिय रहते हैं। जाल बिछाने के इस खतरे को ध्यान में रखते हुए वन अमला जांच के दौरान यह भी देख रहा है कि कहीं फंदा तो नहीं लगाया गया है। हालांकि अब तक की जांच में इस तरह की गतिविधियां सामने नहीं आई हैं।
मुआवजा के लिए प्रकरण तैयार
मवेशी या अन्य किसी पालतू पशुओं का जंगली जानवर शिकार करता है तो इस तरह की घटना में मुआवजा देने का प्रावधान है। कोटा रेंज की इस घटना में मुआवजा प्रकरण तैयार कर वन विकास निगम ने अचानकमार टाइगर रिजर्व को भेजा है। एटीआर प्रबंधन मवेशी मालिका को मुआवजा का भुगतान करेगा।
गांवों में मुनादी और कड़ी निगरानी
वन विभाग ने प्रभावित गांव सहित आसपास के सभी इलाकों में मुनादी करवाकर ग्रामीणों को सतर्क कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि, ग्रामीण अकेले जंगल की ओर न जाएं। देर शाम या सुबह घर से बाहर निकलने से बचें और बच्चों को विशेष रूप से घरों के अंदर रखें।
तीन डिवीजनों की टीम तैनात
यह क्षेत्र वन विभाग की तीन अलग-अलग शाखाओं यानी एटीआर, वन विकास निगम और कोटा मंडल का संगम स्थल है। इसलिए तीनों विभागों की संयुक्त टीमें और मैदानी अमला जंगल में तैनात है। अधिकारी पल-पल की लोकेशन ट्रैक कर रहे हैं।