दुर्ग जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने विवाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में आरोपी को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई

Chhattisgarh Crimesदुर्ग जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने विवाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में आरोपी को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि झूठे वादे पर मिली सहमति को स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता, इसलिए यह बलात्कार की श्रेणी में आता है।

अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) अवध किशोर की अदालत ने सत्र प्रकरण क्रमांक 62/2024 में यह फैसला सुनाया। आरोपी सेवक राम मिर्झा (31), निवासी सेजा, थाना खरोरा, जिला रायपुर को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) के तहत दोषी ठहराया गया।

अभियोजन के अनुसार जून 2022 में पीड़िता की पहचान आरोपी से फेसबुक के माध्यम से हुई थी। आरोपी ने शादी की इच्छा जताई और बातचीत शुरू कर पीड़िता को विवाह का भरोसा दिलाया।

23 जुलाई 2022 को रायपुर के एक मॉल में दोनों की पहली मुलाकात हुई। आरोपी ने पीड़िता को भरोसा दिलाया कि परिवार की सहमति हो या न हो, वह उससे शादी करेगा।

आरोपी ने गांव लौटने के बाद भी संपर्क बनाए रखा और अपनी मां से पीड़िता की बात भी कराई।

कमरे में ले जाकर बनाए संबंध

18 नवंबर 2022 को आरोपी पीड़िता को पदुम नगर स्थित अपने कमरे में ले गया। वहां उसने शादी का भरोसा दोहराते हुए शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने विरोध किया तो आरोपी ने कहा कि वह उसकी होने वाली पत्नी है।

2022 से 2023 तक लगातार शोषण

पीड़िता ने अदालत में बताया कि 2022 से 2023 के बीच आरोपी ने कई बार शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। नवंबर 2023 में रायपुर के एक कमरे में फिर संबंध बनाए गए, जबकि उसी समय आरोपी किसी दूसरी लड़की से सगाई की तैयारी कर रहा था।

सगाई की जानकारी मिलने पर हुआ विवाद

4 फरवरी 2024 को पीड़िता को पता चला कि आरोपी की किसी दूसरी लड़की से सगाई हो रही है। विरोध करने पर आरोपी ने पहले इंकार किया, फिर बहाने बनाने लगा। 20 फरवरी 2024 को आरोपी चार लोगों के साथ पीड़िता के घर पहुंचा और रिश्ता खत्म करने की बात कही।

परिवारों की बैठक, फिर भी आरोपी ने शादी नहीं की

29 फरवरी 2024 को रायपुर के पंडरी स्थित एक रेस्टोरेंट में दोनों परिवारों की बैठक हुई। वहां आरोपी ने शादी के लिए सहमति जताई। लेकिन 6 मार्च 2024 को आरोपी ने दूसरी युवती से विवाह कर लिया।

अदालत में आरोपी ने बयान बदल दिया

विचारण के दौरान आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाने से ही इनकार कर दिया। आरोपी ने कहा कि उसने न तो विवाह का प्रस्ताव दिया और न ही पीड़िता से संबंध बनाए। हालांकि व्हाट्सएप चैट, पेनड्राइव साक्ष्य और गवाहों के बयान से आरोपी का दावा झूठा साबित हुआ। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने न्यायालय को भ्रमित करने की कोशिश की।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

फैसले में अदालत ने कहा,“बलात्कार के मामलों में यदि पीड़िता का साक्ष्य विश्वसनीय और तार्किक है, तो अकेला साक्ष्य भी दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त है।”

कोर्ट ने यह भी माना कि पीड़िता की एफआईआर, मजिस्ट्रेट के सामने बयान और अदालत में दिया गया बयान एक जैसा है। ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला जिससे उसके बयान पर शक किया जा सके।

भ्रम में दी गई सहमति को कोर्ट ने अमान्य माना

अदालत ने कहा कि पीड़िता की सहमति स्वतंत्र नहीं थी। सहमति विवाह के झूठे वादे के भ्रम में दी गई थी, इसलिए यह वैध नहीं मानी जा सकती।

कोर्ट ने माना कि आरोपी का उद्देश्य शुरुआत से विवाह करना नहीं था, बल्कि शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण करना था।

धारा 376(2)(एन) के तहत दोषसिद्धि

कोर्ट ने माना कि 2022 से 2023 तक कई बार संबंध बनाए गए, जो धारा 376(2)(एन) के तहत एक ही महिला के साथ बार-बार बलात्कार की श्रेणी में आता है।

सजा: 10 साल सश्रम कारावास

दोष सिद्ध होने के बाद अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष सश्रम कारावास और 5,000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर आरोपी को एक माह अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। हिरासत में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी। अदालत ने सजा वारंट जारी कर आरोपी को केंद्रीय जेल दुर्ग भेजने का आदेश दिया।

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