
उच्च शिक्षा विभाग की जांच में विश्वविद्यालय को आवंटित की गई राशि में गड़बड़ी, जैम पोर्टल के माध्यम से सामग्री क्रय किए जाने में आर्थिक अनियमितता में संलिप्तता प्रथम दृष्टया पाई गई है। जांच में रजिस्ट्रार दुबे पर छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 के संशोधित 2025 के नियमों का पालन नहीं किया गया है।
उनका यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) (क) के विपरीत काम किया है, जिस पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय, उच्च शिक्षा विभाग बिलासपुर संभाग बिलासपुर (छ.ग.) निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
शैक्षणिक और वित्तीय कार्यों में गड़बड़ी का लगा था आरोप
यूनिवर्सिटी के छात्रों ने प्रभारी कुलसचिव डॉ. शैलेंद्र दुबे और कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेई पर आरोप लगाते हुए कहा था कि, उनकी मिलीभगत से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और वित्तीय कार्यों में अनियमितताएं हो रही हैं। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा साल 2024 में कुलपति के निज सहायक उपेन चंद्राकर की नियुक्ति भी है।
छात्रों का आरोप है कि उनका प्रमाण पत्र राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा परिषद से अनुमोदित नहीं है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी इस प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित किया है।
जैम पोर्टल खरीदी में गड़बड़ी का आरोप
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के खिलाफ शिकायत है कि, एक ही स्वामित्व वाले अलग-अलग फार्म से जेम पोर्टल के जरिए करोड़ों की खरीदी कर ली गई। विवि के खिलाफ अनियमितता की गंभीर शिकायतें मिलती रही थी।
जेम खरीदी में गड़बड़ी को लेकर सरकार भी काफी संवेदनशील है। मुख्य सचिव विकास शील ने जेम खरीदी में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।