
रेडियो संदेश और मध्यस्थता से बनी सरेंडर की राह
इस ऐतिहासिक समर्पण की पटकथा बीते कुछ दिनों से लिखी जा रही थी। माओवादियों के लीडर विकास ने गृहमंत्री को पत्र लिखकर सरेंडर की इच्छा जताई थी, जिसके जवाब में गृहमंत्री ने रेडियो के माध्यम से उन्हें सुरक्षित समर्पण का पूरा विश्वास दिलाया। इस प्रक्रिया में बस्तर के पत्रकार विकास तिवारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे माओवादियों के ठिकाने पर सरायपाली पहुंचे, उनसे बात की और गृहमंत्री विजय शर्मा से उनकी सीधी चर्चा कराई। भरोसे का माहौल बनने के बाद शनिवार रात इन सभी 15 माओवादियों को पुलिस की बस से सुरक्षित स्थान पर लाया गया।
हथियारों का जखीरा और इनामी माओवादियों की वापसी
समर्पण करने वाले ये सभी 15 माओवादी इनामी थे और अपने साथ तीन एके-47 व 12 अन्य अत्याधुनिक हथियार लेकर पहुंचे थे। इस समूह का नेतृत्व ओडिशा के पश्चिम सब जोनल ब्यूरो सचिव विकास उर्फ सुदर्शन ने किया, जिस पर अकेले 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। एसपी प्रभात कुमार ने इस सफल सरेंडर की पुष्टि की है। अधिकारियों के अनुसार, ये माओवादी लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे, लेकिन शासन की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
पुनर्वास नीति और विकास का पड़ रहा असर
अधिकारियों ने इस सामूहिक आत्मसमर्पण को क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम बताया है। शासन की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को अब पुनर्वास, आर्थिक सहायता और कौशल विकास के अवसरों का लाभ दिया जाएगा। लगातार हो रहे इन समर्पणों को माओवादी संगठन के कमजोर पड़ते प्रभाव और शासन की विकासोन्मुख नीतियों की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
गरियाबंद में 46 लाख रुपये व हथियारों का जखीरा जब्त
शनिवार को भी गरियाबंद जिले में माओवादियों के 46,31,500 रुपये और बड़ी संख्या में विस्फोटक बरामद किए गए। यह कार्रवाई पुलिस की ई-30 आप्स टीम और धमतरी डीआरजी की संयुक्त टीम ने मैनपुर थाना क्षेत्र के बड़े गोबरा के दुर्गम सांपसाटी पहाड़ी क्षेत्र में की। बरामद राशि में 2,000 रुपये के 100 पुराने नोट शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत दो लाख रुपये है। गरियाबंद के एडिशनल एसपी धीरेंद्र पटेल ने बताया कि पिछले दो वर्षों में पुलिस ने एक करोड़ आठ लाख रुपये की राशि जब्त की है।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर माओवादी नेताओं द्वारा इस क्षेत्र में नकद और हथियार छिपाए जाने का राजफाश हुआ। पुलिस ने तलाशी में कई ठिकानों से महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की। हथियारों में एक भरमार बंदूक, एक सुरका राइफल, 32 बीजीएल सेल, 200 से अधिक जिंदा कारतूस, एक लैपटाप, दो मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण शामिल हैं।
जनवरी 2026 में प्रमुख समर्पण
- 7 जनवरी 2026: सुकमा जिले में एक साथ 26 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 7 महिलाएं भी शामिल थीं। इन सभी पर कुल मिलाकर लगभग ₹65 लाख का इनाम घोषित था। ये मुख्य रूप से दक्षिण बस्तर और अबुझमाड़ डिवीजन में सक्रिय थे।
- 23 जनवरी 2026: धमतरी जिले में 9 माओवादियों ने समर्पण किया, जिनमें 7 महिलाएं शामिल थीं। इन पर कुल ₹47 लाख का इनाम था।
- 30 जनवरी 2026: सुकमा में ही 4 अन्य माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया, जिन पर कुल ₹8 लाख का इनाम था।
फरवरी 2026 में प्रमुख समर्पण
- 5 फरवरी 2026: बीजापुर और बस्तर क्षेत्र में 12 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इस समूह में 8 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल थे। समर्पण करने वालों में दरभा डिवीजन का एक बड़ा नेता (DVCM) सोमडू मड़काम भी शामिल था, जिस पर ₹8 लाख का इनाम था। इन सभी पर कुल ₹54 लाख का इनाम घोषित था।