छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) के अफसरों ने 7 साल में 258 घूसखोर-घोटालेबाजों को पकड़ा है। इनमें जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायक के सवाल पर सीएम विष्णुदेव साय ने इस बात का खुलासा किया है।
विधायक पुरंदर मिश्रा ने सवाल पूछा था कि, 1 जनवरी 2019 से 31 दिसंबर 2025 के बीच एसीबी-ईओडब्ल्यू को कितनी शिकायतें मिलीं और उनमें कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई।
इस सवाल के जवाब में सीएम ने बताया कि, एसीबी और ईओडब्ल्यू को कुल 5502 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें शुरुआती जांच और सत्यापन के बाद 258 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई। इनमें से 173 प्रकरणों की जांच पूरी होने के बाद अदालत में चालान भी पेश किया जा चुका है।
46 मामले की अभी भी चल रही जांच
सीएम साय के अनुसार, शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) के अफसरों ने जांच की। उसके बाद दोषियों पर कार्रवाई कर एफआईआर दर्ज की। वर्तमान में 46 मामले अभी भी जांच के स्तर पर लंबित हैं।
शिकायतों की जांच की निश्चित सीमा नहीं
सदन में पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि, शिकायतों की जांच, कार्रवाई या एफआईआर दर्ज करने के लिए फिलहाल कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच एक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें कई विभागों से दस्तावेज और तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगानी पड़ती है।
इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17(क) के तहत संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई से पहले सक्षम प्राधिकारी से पूर्वानुमोदन लेना भी जरूरी होता है। जब तक सभी आवश्यक दस्तावेज और अनुमति प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब जांच या सत्यापन के दौरान प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के प्रमाण सामने आते हैं, तभी संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है।