
वहीं मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि धान की रिसाइक्लिंग रोकने के लिए अस्थायी तौर पर उठाव रोका गया था और 31 मार्च से पहले शेष धान उठा लिया जाएगा। सदन में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी इस फैसले और किसानों के नुकसान को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
बस्तर संभाग के आंगनबाड़ी केन्द्रों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठा। विधायक लखेश्वर बघेल ने बताया कि संभाग में 2209 आंगनबाड़ी केन्द्र बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। 1021 भवन जर्जर हालत में हैं, जबकि बड़ी संख्या में केन्द्रों में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं।
इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि कई भवनों के निर्माण और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था के लिए स्वीकृतियां दी गई हैं और बजट की उपलब्धता के अनुसार कार्य कराया जाएगा।
विधायक रामकुमार यादव के सवाल और मंत्री दयालदास के जवाब
विधायक रामकुमार यादव – सक्ती जिला समेत पूरे प्रदेश में धान का उठाव 17 जनवरी से आपने रोक दिया। यह आपने खुद स्वीकार किया है। जबकि सक्ती जिले में बहुत सारे राइस मिल हैं। धान का उठाव नहीं होने पर बारिश में धान खराब हो जाता है। इतने राइस मिल होने के बाद भी धान का उठाव क्यों रोका गया।
मंत्री दयालदास बघेल – धान की रिसाइक्लिंग न हो, इस कारण धान का उठाव रोका गया था।
रामकुमार यादव – धान का उठाव नहीं होने की वजह से धान पानी में भीग जाता है और इसका खामियाजा गरीबों को उठाना पड़ता है। गलती सरकार और अधिकारियों की है। बताया गया है कि सक्ती जिले में 30 करोड़ रुपए का धान चूहों ने खा लिया। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
दयालदास बघेल – सक्ती जिले में 47.41 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। इसमें से 44.25 लाख क्विंटल धान का उठाव हो चुका है। केवल 3.16 लाख क्विंटल धान का उठाव बाकी है। 31 मार्च से पहले धान उठा लिया जाएगा।
चरणदास महंत – मंत्री जी ने अपने जवाब में कहा कि धान की रिसाइक्लिंग होती थी। इसका मतलब विभाग ने इसे स्वीकार किया है। जहां-जहां रिसाइक्लिंग की सूचना मिली, वहां क्या कार्रवाई की गई।
दयालदास बघेल – निर्णय यह था कि रिसाइक्लिंग न हो, इसलिए धान का उठाव रोक दिया गया।
चरणदास महंत – 17 जनवरी को धान खरीदी बंद करा दी गई, जबकि 31 जनवरी तक धान खरीदी होनी थी। इस बीच जिन किसानों के पास टोकन थे, वे भी अपना धान नहीं बेच पाए। इस वजह से 600 करोड़ रुपए का धान नहीं बिक सका। इसके लिए कौन जवाबदार होगा।
दयालदास बघेल – मैंने धान खरीदी की बात नहीं कही थी, बल्कि धान के उठाव को रोकने की बात कही थी। धान खरीदी 17 जनवरी को बंद नहीं की गई थी।
विधायक लखेश्वर बघेल – बस्तर संभाग में भवन विहीन आंगनबाड़ी केन्द्र कब से संचालित हो रहे हैं।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े – इसकी जानकारी मैं उपलब्ध करा दूंगी।
लखेश्वर बघेल – बस्तर संभाग में 2209 आंगनबाड़ी केन्द्र भवन विहीन हैं, 1021 भवन जर्जर स्थिति में हैं। 3445 केन्द्रों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है और 4200 केन्द्रों में शौचालय उपलब्ध नहीं है। सरकार नर्सरी कक्षाएं शुरू करना चाहती है, लेकिन बिना भवन, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के यह कैसे संभव होगा।
लक्ष्मी राजवाड़े – कई भवनों के निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई है। पेयजल और शौचालय की व्यवस्था के लिए भी स्वीकृतियां मिली हैं।
लखेश्वर बघेल – 15 साल हो गए, लेकिन आंगनबाड़ी केन्द्रों के भवन नहीं बन पाए हैं। इसके लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
लक्ष्मी राजवाड़े – बजट की उपलब्धता के अनुसार भवन निर्माण और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था कराई जाएगी।