छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में फायर स्टेशनों की कमी को लेकर चिंता जताई है। डिवीजन बेंच ने कहा कि जिन जगहों पर अब तक फायर स्टेशन नहीं है, वहां जल्द व्यवस्था की जाए। इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फायर स्टेशन पर एक्शन प्लान बनाकर प्रस्तुत करने कहा है।
दरअसल बिलासपुर में फायर स्टेशन निर्माण के लिए साल 2020 में मंजूरी मिल गई थी, लेकिन ढाई साल में जिला प्रशासन के अफसर जगह की तलाश नहीं कर पाए। मोपका स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और दुकानों में आग लगने के बाद फायर स्टेशन निर्माण का मामला फिर से उठा।
इसे लेकर मीडिया में खबरें भी आई, जिसे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने संज्ञान में लेकर जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है।
शासन का जवाब- कई जिलों में नहीं है फायर स्टेशन
इस मामले में राज्य सरकार ने शपथपत्र में बताया कि वर्तमान में 9 जिलों में पूर्ण रूप से फायर स्टेशन संचालित है। इसमें दुर्ग, नवा रायपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, राजनांदगांव, कबीरधाम शामिल हैं।
बिलासपुर और उरला-सिलतरा में निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, जबकि 7 जिलों में टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इनमें जशपुर, महासमुंद, कोरिया, दंतेवाड़ा, कांकेर, बलौदाबाजार, धमतरी शामिल है।
इसके बाद भी कई जिलों में अभी भी फायर स्टेशन स्थापित ही नहीं हुए हैं, जहां फिलहाल होमगार्ड परिसर से अस्थायी संचालन हो रहा है।
प्रदेश में 147 वाहन फिर संसाधनों की है कमी
शासन ने बताया कि राज्य में 147 फायर फाइटिंग वाहन उपलब्ध। साल 2024-25 में 20 नए वाहन खरीदे गए, जिसके बाद साल 2025-26 में 7 और वाहन जोड़े गए। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में संसाधनों की कमी बनी हुई है, खासकर बड़े भौगोलिक क्षेत्रों जैसे बस्तर संभाग में फायर संसाधन की ज्यादा कमी है।
फायर स्टेशन के लिए जमीन उपलब्ध नहीं
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि फायर स्टेशन बनाने के लिए सही जगह जमीन नहीं मिल रही है। कई जगह जमीन मिल रही है, वह शहर से बहुत दूर है। जिससे आपात स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम बढ़ जाता है।
शासन ने बताया कि सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि कम से कम 2 एकड़ जमीन उपयुक्त स्थान पर उपलब्ध कराएं।
बिलासपुर निगम का जवाब- नहीं है कोई भूमिका
बिलासपुर निगम ने अपने शपथपत्र में बताया कि फायर से जुड़ी कोई भी जिम्मेदारी अब नगर निगम के पास नहीं है। सभी जिम्मेदारियां अब राज्य के फायर एंड इमरजेंसी सर्विस विभाग को सौंप दी गई है।
यह बदलाव छत्तीसगढ़ फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट, 2018 लागू होने के बाद हुआ। नगर निगम अब केवल समन्वय, जमीन उपलब्ध कराने और बुनियादी सुविधाएं देने में सहयोग कर रहा है।
कोर्ट कमिश्नर ने कहा- कई विभागों में समन्वय की कमी
इस मामले में हाईकोर्ट से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर ने भी अपनी रिपोर्ट दी है, जिसमें अग्निशमन की अव्यवस्था और खामियों को बताया गया है। रिपोर्ट में बताया कि राज्य में फायर सेवाएं एकीकृत कमांड के बजाय अलग-अलग विभागों में बंटी हुई हैं।
जैसे नगर निकाय, जिला प्रशासन, केंद्र सरकार की संस्थाएं (रेलवे, एनटीपीसी, एसईसीएल), निजी औद्योगिक इकाइयों के पास अलग-अलग दमकल है। इनके बीच समन्वय की कमी है, जिसके कारण आपात स्थिति में देरी होती है।
इसके साथ ही कानून में प्रावधान होने के बावजूद यूनिफाइड कमांड सिस्टम लागू नहीं हुआ, कई जगह फायर टेंडर और स्टाफ की भारी कमी है।
हाईकोर्ट ने नए शपथपत्र में मांगा एक्शन प्लान
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य के कई स्थानों पर अभी भी फायर स्टेशन नहीं हैं। उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द प्रभावी कदम उठाएंगे, ताकि आपात स्थिति में समय पर राहत मिल सके।
मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि फायर विभाग के डायरेक्टर नया शपथपत्र पेश करें, जिसमें एक्शन प्लान के साथ यह बताने कहा है कि फायर स्टेशन को लेकर अब तक की प्रगति और भविष्य की टाइमलाइन क्या होगी।