छत्तीसगढ़ में मुकबधिर से रेप के आरोपी को हाईकोर्ट ने मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ में मुकबधिर से रेप के आरोपी को हाईकोर्ट ने मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला साल 2020 का है। जब घर में कोई नहीं था तो आरोपी रिश्तेदार ने घर घुसकर युवती से दुष्कर्म किया था। वारदात के बाद युवती ने इशारे में अपनी मां को पूरी बात बताई थी।

मामला बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र का है। पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी, इसलिए कोर्ट में प्लास्टिक की गुड़िया का सहारा लेकर उसने अपने साथ हुए गलत काम की गवाही दी थी।

हाईकोर्ट ने इस गवाह को भरोसेमंद माना है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इस गवाह को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों के माध्यम से दी गई जानकारी भी कानूनी तौर पर मौखिक साक्ष्य है।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल मूक-बधिर से रेप का मामला बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र का है। 29 जुलाई 2020 को 20 साल की युवती घर पर अकेली थी, वह बोल सुन नहीं सकती थी। माता-पिता खेत में काम करने गए थे, तभी रिश्तेदार नीलम कुमार देशमुख घर में घुस गया।

इस दौरान उसने युवती के साथ रेप किया और मौके से फरार हो गया, जब शाम को मां काम से घर लौटी तो उसने बेटी को रोते हुए पाया।

मां को इशारों में बताई आपबीती

पीड़िता ने मां को इशारों में आपबीती बताई। साथ ही आरोपी की भी पहचान बताई, जिसके बाद परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे। शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 450 और 376(2) के तहत केस दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया।

मूक- बधिर होने से बयान दर्ज करना चुनौती थी

पीड़िता जन्म से ही बोलने और सुनने में अक्षम थी, इसलिए कोर्ट के सामने उसकी गवाही दर्ज कराना एक बड़ी चुनौती थी। सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद ली, जब कुछ सवाल पूछने में दिक्कत आई तो कोर्ट ने प्लास्टिक की गुड़िया मंगवाई।

पीड़िता ने गुड़िया के माध्यम से इशारों में बताया कि आरोपी ने उसके साथ क्या गलत किया था। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई।

वैज्ञानिक सबूतों ने पुख्ता किया जुर्म

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह से भरोसेमंद है। इसके अलावा मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भी जुर्म की पुष्टि की। जांच में पीड़िता के स्लाइड्स और आरोपी के कपड़ों पर मानव शुक्राणु पाए गए थे, जिसका आरोपी कोई जवाब नहीं दे सका था।

मूकबधिर होने से खारिज नहीं की जा सकती गवाही

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि केवल मूक-बधिर होने के आधार पर किसी गवाह की बात को खारिज नहीं किया जा सकता। इशारों से दी गई जानकारी को भी कानूनी तौर पर मौखिक साक्ष्य माना जाता है।

कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376(2) के तहत मौत होने तक उम्रकैद और धारा 450 के तहत 5 साल जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 21 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। आरोपी वर्तमान में जेल में बंद है और उसे अपनी पूरी सजा काटनी होगी।