बालिग, शादीशुदा महिला की मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप की श्रेणी में नहीं आते

Chhattisgarh Crimesबालिग, शादीशुदा महिला की मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप की श्रेणी में नहीं आते।’ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप के एक मामले में फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने आरोपी को 4 साल चले रेप केस से दोष मुक्त कर दिया है।

मामला साल 2022 का है। शादीशुदा महिला और आरोपी दोनों एक दूसरे से बात किया करते थे। केस की जांच में ये बात सामने आई कि आरोपी ने जानबूझ संबंध नहीं बनाए, बल्कि इसमें दोनों की सहमति थी।

दरअसल, बेमेतरा जिले की रहने वाली एक शादीशुदा महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि वह एक एग्रीकल्चरल कॉलेज में मजदूरी करने जाती थी, जहां गांव के बाकी लोग भी काम करते थे। वहीं, गांव का एक व्यक्ति, जो इस मामले में आरोपी है, वो भी मजदूरी के लिए आता था।

दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई

19 जून 2022 को आरोपी ने उससे बातचीत शुरू की और शादी का वादा करते हुए उसे बहलाने की कोशिश की। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि, आरोपी ने बार-बार शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया।

महिला 3 महीने की प्रेग्नेंट थी

25 जुलाई 2022 की सुबह करीब 4 बजे जब वह शौच के लिए जा रही थी, तब आरोपी उससे मिला और फिर शादी का भरोसा दिलाकर उसे अपने घर ले गया और संबंध बनाए। पीड़िता के अनुसार उस समय वह करीब तीन महीने की प्रेग्नेंट थी।

सामाजिक बदनामी के डर से उसने इस घटना की जानकारी किसी को नहीं दी। बाद में पति के पूछने पर उसने पूरी बात बताई और इसके बाद पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के आधार पर किया था बरी

इस मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

इस मामले की सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि, शादीशुदा महिला की सहमति से बने संबंध को रेप नहीं माना जा सकता है। युवक को दोषमुक्त कर दिया गया।

अब हाईकोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि, गवाहों के बयानों से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने या चोट पहुंचाने की धमकी देकर उसकी सहमति प्राप्त की थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि पीड़िता को यह भ्रम था कि वह कानूनी रूप से आरोपी की पत्नी है।

इसके अलावा, यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि विक्टिम अपनी सहमति नहीं बता पाई थी। विक्टिम के कोर्ट में दिए गए बयानों को देखने से यह साफ है कि आरोपी ने सहमति से विक्टिम के साथ फिजिकल रिलेशन बनाए थे। पीड़िता पहले से शादीशुदा थी और गर्भवती भी थी।

यह भी साबित नहीं हुआ कि पीड़िता नशे में थी, उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी या वह अपनी सहमति देने की स्थिति में नहीं थी। एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्ज़ी और सहमति से बनाए गए फिजिकल रिलेशन रेप का जुर्म नहीं बनता है। इसके साथ हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज किया है।

Exit mobile version