
जांच में सामने आया है कि कई पुलिसकर्मियों ने ऐसी गाड़ियां खरीदी हैं जो उनके रिश्तेदारों या परिचितों के नाम पर पंजीकृत हैं। इन वाहनों का उपयोग पुलिसकर्मी अपनी पहचान बताने और टोल या चेकिंग से बचने के लिए करते हैं। यह न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि विभागीय सेवा सिद्धांतों के भी विपरीत है।
वर्दी की आड़ में नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं
इस गंभीर स्थिति पर जिले के एडिशनल एसपी अविनाश मिश्रा ने मीडिया को बताया कि इस तरह के मामले उनके संज्ञान में आए हैं। एडिशनल एसपी ने आश्वासन दिया कि वर्दी की आड़ में नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
होगी दंडात्मक कार्रवाही
उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए बराबर है और जल्द ही ऐसे बिना नंबर वाले या नियम विरुद्ध नेम प्लेट लगाकर घूमने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान चलाकर दंडात्मक कार्रवाही की जाएगी। अब देखना यह होगा कि विभाग अपने ही कर्मचारियों पर नकेल कसने में कितना सफल होता है, जो खुद को कानून से ऊपर समझ रहे हैं।