छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में एक युवक ने महाराष्ट्र के राजकीय पशु ‘शेकरू’ (भारतीय विशाल गिलहरी) का शिकार किया। 9 शेकरू को मारने के बाद हिड़मा के गाने पर रील बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल दिया। उसके बाद सभी शेकरू को पकाकर खा गए। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग की टीम उसके घर तक पहुंच गई।
अब युवक को पकड़ लिया गया है। दुर्लभ प्रजाति के इस वन्य जीव का शिकार करने में युवक के अलावा 10 और भी लोग शामिल हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। फिलहाल विभागीय असफर युवक से पूछताछ कर रहे हैं। घटना बारसूर थाना इलाके की है।
जानिए क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, आरोपी बंशी राम कवासी, बारसूर इलाके का रहने वाला है। सोशल मीडिया पर उसने शेकरू के शिकार के बाद रील पोस्ट की। जिसमें हिड़मा का वायरल गाना भी जोड़ रखा था। ये रील दंतेवाड़ा वन विभाग के पास पहुंचा।
जिसके बाद DFO के निर्देश पर दंतेवाड़ा रेंजर डॉ प्रीतेश पांडेय और गीदम रेंजर ज्योत्सना पांडेय के नेतृत्व में टीम बनाई गई। जिसके बाद टीम ने युवक की तलाश शुरू की।
लोकेशन ट्रैक किया, फिर घर तक पहुंची टीम
वन विभाग की टीम ने युवक की इंस्टाग्राम ID से उसका नंबर और लोकेशन निकाला। फिर बारसूर के अंदरूनी इलाके अबूझमाड़ क्षेत्र में बसे एक गांव पहुंची। जहां से युवक को पकड़ लिया गया। पूछताछ में युवक ने बताया कि शिकार में उसके साथ कुल 11 और लोग शामिल थे। जिनकी तलाश जारी है।
युवक ने बताया कैसे किए शिकार
आरोपी ने वन विभाग की टीम को बताया कि, जंगल में पेड़ों पर शेकरू रहते हैं। करीब दो-तीन दिन पहले वह अपने कुछ साथियों के साथ जंगल गया था, जहां पहले उसने जमीन और पेड़ों की टहनियों पर ही कुछ खाने के लिए रख दिया था। जब शेकरू झुंड में खाना खाने पहुंचे तो गुलेल मारकर 9 शेकरू का शिकार किया। इसके बाद उन्हें घर लेकर आए।
फिर घर के आंगन में रखकर टशन में इंस्टाग्राम रील बनाई, फिर साथियों के साथ मिलकर शेकरू को पकाकर खा गए। ये पहली दफा नहीं था कि शेकरू का शिकार किया गया हो, इससे पहले भी इस प्रजाति के वन्य जीवों का शिकार किया गया है। गीदम रेंजर ज्योत्सना पांडेय ने बताया कि, बाकी आरोपियों के नामों का पता चल गया है, जिनकी तलाश जारी है।
क्या है इस दुर्लभ प्रजाति की खासियत
- यह सामान्य गिलहरियों से काफी बड़ी होती है, लगभग 1 मीटर तक लंबी (पूंछ सहित)।
- इसका शरीर गहरे भूरे, लाल, क्रीम और कभी-कभी बैंगनी शेड में होता है। ये बहुत आकर्षक दिखती है।
- यह जमीन पर बहुत कम आती है, ज्यादातर ऊंचे पेड़ों पर रहती है।
- एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर 20 फीट तक कूद सकती है।
- पेड़ों की ऊंचाई पर बड़े-बड़े घोंसले बनाती है।
- फल, फूल, बीज और छाल खाती है। यही इसका भोजन है।
इन जगहों पर पाई जाती है ये प्रजाति
- मुख्य रूप से यह प्रजाति पश्चिमी घाट (महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल) में पाई जाती है।
- छत्तीसगढ़ में इसकी मौजूदगी बहुत कम या लगभग नहीं के बराबर मानी जाती है।
- बस्तर के अबूझमाड़ इलाके के घने जंगलों में बहुत रेयर मिलती है।
- CG के जंगलों में आमतौर पर दूसरी छोटी गिलहरी प्रजातियां ज्यादा मिलती हैं, लेकिन शेकरू जैसी बड़ी गिलहरी वहां सामान्य रूप से नहीं पाई जाती।