
तखतपुर टीआई विवेक पांडेय का कहना है कि बकरा-बकरियों की मौत किसी वन्यजीव के हमले से हुई होगी, क्योंकि जख्म वाली जगह पर पंजे और नाखून के निशान मिले हैं।।
इधर, बकरा-बकरियों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जब शव का पोस्टमार्टम किया गया तो पशु चिकित्सक ने गहरे जख्म को देखकर आशंका जताई है कि यह लकड़बग्घे की करतूत भी हो सकती है। हालांकि, अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह किसी वन्यजीव का हमला था या मौत की कोई और वजह है। पशुपालक प्रेमलाल बिरको के लिए ये बकरियां उनकी आजीविका का मुख्य साधन थीं।
कहीं लकड़बग्घे के हमले से
ग्रामीणों का कहना है कि विगत महीने में कुछ गायों की मौत भी इसी तरह हुई थी। जिसमें गाय के गले में पंजे, नाखून के गहरे जख्म देखे गए थे। लिहाजा माना जा रहा है कि बकरा-बकरियों की मौत शायद लकड़बग्घे के हमले से भी हो सकती है।
सुबह बकरे-बकरियों मृत पाए गए
प्राप्त जानकारी के अनुसार खैरी निवासी प्रेमलाल बिरको रोज की तरह अपने बकरा-बकरियों को घर के आंगन में बांधकर सो गया था।। सुबह जब उठा तो देखा कि आंगन में बंधे 17 बकरा-बकरियां मृत पड़े थे। कुछ के पेट फटे हुए थे और कई के शरीर पर गहरे जख्म के निशान थे।
घटना की जानकारी प्रेमलाल ने गांव के सरपंच सुखदेव सिंगरौल को दी, जिसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सूचना दी।
इस हादसे से किसान परिवार बेहद दुखी है। ये बकरा-बकरियां उनकी आजीविका का मुख्य सहारा थीं।