सरगुजा जिला शिक्षा अधिकारी ने 2 बड़े निजी स्कूल मोंट फोर्ट स्कूल और बिरला ओपन माइंड अंतर्राष्ट्रीय स्कूल को नोटिस जारी कर भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है। ये स्कूलों पर निजी प्रकाशकों की मंहगी किताबें-कॉपियों का बंडल खरीदने के लिए बाध्य करने, मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने और सीबीएसई नियमों का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
सरगुजा में निजी स्कूलों की तरफ से मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने, निजी प्रकाशकों की मंहगी किताबें और ड्रेस कुछ निश्चित दुकानों से खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य करने समेत कई शिकायतें मिली थीं। दो दिन पूर्व स्कूलों की जांच की गई, इसमें कई शिकायतें मिलीं।
डीईओ ने स्कूल संचालकों की बैठक ली थी। बैठक में मोंट फोर्ट स्कूल और बिरला ओपन माइंड स्कूल संचालकों ने स्वीकार किया कि वे निजी प्रकाशकों की मंहगी किताबें चला रहे हैं। ये किताबें निश्चित दुकानों में ही उपलब्ध हैं।
DEO ने थमाया नोटिस, मांगा जवाब
डीईओ ने मोंट फोर्ट स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेजा है। जिसमें बताया गया है कि, अभिभावकों की शिकायत की जांच के लिए गुरुवार को एसडीएम ने स्कूल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पैरेंट्स मिटिंग में अभिभावकों ने मनमानी के कई आरोप लगाए थे।
स्कूल में कक्षा पहली से 8वीं तक निजी प्रकाशकों की मंहगी किताबें चलाई जा रही हैं। सभी किताबें और कॉपियां आशा बुक डिपो और राणा ब्रदर्स से बंडल बनाकर ही खरीदने अभिभावकों को कहा गया। अभिभावकों को मोबाइल मैसेज के जरिए इन दुकानों से ही सामग्री लेने का दबाव बनाया गया।
एक अभिभावक ने बताया कि, स्कूल ने किताबों की सूची दी और निर्देश दिया कि, कहां से लेना है। बंडल पूरा न होने पर या एक-दो किताबें कम होने पर भी स्वीकार नहीं किया गया।
निरीक्षण में CBSE एफिलिएशन बायलॉज 2018 के क्लॉज का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया। नर्सरी से आठवीं तक केवल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ाई जा रही हैं, जबकि 9वीं से 12वीं में भी कुछ ऐसी ही महंगी किताबें अनिवार्य हैं। हर साल एडमिशन फीस वसूली जा रही है, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत है।
शिक्षा सत्र 2025-26 की तुलना में 2026- 27 में सभी मदों में 5 से 14 प्रतिशत तक फीस बढ़ाई गई। स्कूल के सूचना पटल पर यूनिफॉर्म और किताबों की सूची भी प्रदर्शित नहीं है। प्राचार्य/प्रबंधक से दो दिनों में जवाब मांगा गया है। जवाब नहीं मिलने पर 2070 छात्रों से वसूले गए कुल फीस राशि की 50 फीसदी राशि का जुर्माना प्रस्तावित है।