
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी डानेश्वर निषाद (निवासी ग्राम तिरगा, दुर्ग) पर आरोप था कि उसने पीड़िता को सिद्धार्थ पैलेस के कमरा नंबर 312 में ले जाकर शादी का झांसा दिया और दो दिनों तक शारीरिक संबंध बनाए। इस आधार पर थाना कोतवाली में धारा 376(2)एन और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
93 दिनों के भीतर निर्णय आया
इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी 6 जनवरी को हुई थी। चालान 20 जनवरी को पेश किया गया, जबकि आरोपी को 27 फरवरी को जमानत मिली। न्यायालय ने इस मामले में अंतिम फैसला 9 अप्रैल को सुनाया, यानी कुल 93 दिनों के भीतर निर्णय आ गया।
पीड़िता नहीं कर पाई अपने आरोपों को साबित
न्यायाधीश विजय कुमार होता ने सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़िता और अन्य 19 गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास थे। पीड़िता स्वयं अपने आरोपों को साबित करने में विफल रही। न्यायालय ने लंबित मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकरणों में अनावश्यक विलंब नहीं किया जाना चाहिए।
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मौलैश तिवारी ने प्रभावी पैरवी की। उनकी दलीलों के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषमुक्त करने का आदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि पिछले माह भी इसी कोर्ट ने अधिवक्ता तिवारी की पैरवी पर एक अन्य आरोपी पप्पू साहू को गंभीर धाराओं (376, 377, 506) से दोषमुक्त किया था। इस तुरंत निर्णय पर अधिवक्ता संघ के सदस्यों वीणा साहू, जितेश देवांगन, हृदेश तिवारी, मेधा साहू सहित अन्य ने वरिष्ठ अधिवक्ता मौलैश तिवारी को बधाई दी है। यह जानकारी अधिवक्ता लिपिक राकेश दुबे द्वारा दी गई।