
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनी ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड का फील्ड ऑफिसर अभिषेक कुमार सिंह और अकाउंटेंट तिजऊ राम निर्मलकर शामिल हैं। ACB ने आरोपियों को 3 दिन की रिमांड पर लिया है। दरअसल, कागजों में शराब दुकानों में एक्स्ट्रा शिफ्ट दिखाई गई, लेकिन इसका पैसा कर्मचारियों तक पहुंचा ही नहीं।
इस मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक कार्रवाई से हुई। 29 नवंबर 2023 को ED ने रायपुर में 3 संदिग्धों से 28.80 लाख कैश बरामद किए थे। जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो पता चला कि यह पैसा कर्मचारियों के पसीने की कमाई (ओवरटाइम) का था, जिसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया।
ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी (IPC 420, 120-बी) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
कर्मचारियों को सामने रखकर भरी गई जेब
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। साल 2019-20 से 2023-24 के बीच सरकार ने शराब दुकानों में तैनात कर्मचारियों को अतिरिक्त काम के बदले 115 करोड़ रुपए का ओवरटाइम भुगतान मंजूर किया था।
नियम के अनुसार यह पैसा सीधे उन कर्मचारियों को मिलना था, जो एक्स्ट्रा शिफ्ट में काम कर रहे थे। लेकिन मैनपावर एजेंसियों ने कागजों पर कर्मचारियों का ओवरटाइम दिखाया, लेकिन असल में भुगतान उन तक पहुंचा ही नहीं।
एजेंसियों ने यह राशि कमीशन के रूप में निकाली। जांच एजेंसी का दावा है कि यह पैसा CSMCL के भ्रष्ट अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के बीच बांटा गया। इसके तार कारोबारी अनवर ढेबर से जुड़े होने की बात भी सामने आ रही है।
27 अप्रैल तक रिमांड पर फील्ड ऑफिसर-अकाउंटेंट
ACB के मुताबिक, गिरफ्तार अभिषेक और तिजऊ राम का मुख्य काम कंपनी के बैंक खाते से कैश निकालकर अधिकारियों तक पहुंचाना था। 29 नवंबर को बरामद किए गए 28.80 लाख रुपए भी इसी सिंडिकेट का हिस्सा थे।
सोमवार को दोनों आरोपियों को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया है। पूछताछ में CSMCL के कुछ बड़े अधिकारियों और कांग्रेस सरकार में सत्ता के करीबी रहे लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल, ACB की टीम डिजिटल साक्ष्यों और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।