
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 7 मई से पहले सभी एडमिशन पूरे किए जाएं। साथ ही इस काम के लिए एक साफ और पूरी कार्ययोजना भी पेश करने को कहा है। दरअसल प्रदेश में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो गया है, लेकिन आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया धीमी चल रही है।
बता दें कि प्रदेश भर के स्कूलों में आरटीई के तहत 38 हजार 438 आवेदन मिले हैं, जिसमें से 23 हजार 766 यानी 62% की ही जांच पूरी हुई है। वहीं 14 हजार से अधिक आवेदन पेंडिंग हैं। कई जिलों में 10% से भी कम जांच हो पाई है।
डीपीआई ने पंजीयन और नोडल वेरीफिकेशन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक समय तय किया था, लेकिन डेडलाइन के बाद भी प्रक्रिया अधूरी है।
अगस्त तक चलेगी एडमिशन की प्रक्रिया
एडमिशन प्रक्रिया के अनुसार आरटीई के तहत छात्र पंजीयन की अंतिम तिथि 31 मार्च रखी गई थी। काउसलिंग प्रक्रिया में 13 से 17 अप्रैल तक लाटरी और सीट आवंटन किया गया। इसके बाद छात्रों को एक से 30 मई तक प्रवेश लेना होगा।
दूसरे चरण की प्रक्रिया 8 जून से शुरू हो जाएगी। इसमें नए स्कूलों का रजिस्ट्रेशन होगा। उसके बाद 1 से 11 जुलाई तक छात्र पंजीयन होंगे, फिर 27 से 31 जुलाई तक लाटरी और आवंटन होगा। इसके बाद छात्रों को स्कूल में दाखिला तीन से 17 अगस्त तक लेना होगा।
शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि पहले चरण की लाटरी निकाल ली गई है। इसमें 15 हजार छात्रों को सीटें आवंटित हुई हैं। इन्हें 1 से 30 मई तक एडमिशन लेना होगा। इसके बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया पूरी होगी।
हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग की इस प्रक्रिया और धीमी गति पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अगस्त तक सिर्फ एडमिशन होगा तो बच्चे पढ़ाई कब करेंगे। कोर्ट ने शिक्षा विभाग से सात मई से पहले पूरी प्रक्रिया और एडमिशन जल्द हो इसकी कार्ययोजना पेश करने कहा है।