बिलासपुर में डिजिटल अरेस्ट और टेरर फंडिंग का डर दिखाकर रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से 1.4 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले गैंग के दो सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया

Chhattisgarh Crimesबिलासपुर में डिजिटल अरेस्ट और टेरर फंडिंग का डर दिखाकर रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से 1.4 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले गैंग के दो सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों से केवल बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल व दस्तावेज जब्त किया गया है। आरोपियों ने ठगी की रकम को हैंडलर तक पहुंचाने का दावा किया है। उनकी गिरफ्तारी राजस्थान के चुरू जिले से की गई है।

रियल हेवन निवासी प्रो. रमन श्रीवास्तव (82) रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। वे डीपी कॉलेज में पदस्थ थीं, उनका बेटा प्रशांत श्रीवास्तव मुंबई में एचआर कंसल्टेंसी में डायरेक्टर है। उन्होंने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें बताया गया कि उनकी मां के साथ एक करोड़ 4 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी हुई है। उनके मोबाइल पर 20 अप्रैल को वॉट्सऐप पर अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अफसर संजय PSI बताया था।

फर्जी बैंक स्टेटमेंट और डेबिट कार्ड दिखाकर डराया ठगों ने खुद को बड़ा अधिकारी बताकर रिटायर्ड प्रोफेसर पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया और उनके नाम के फर्जी बैंक स्टेटमेंट और डेबिट कार्ड जैसे दस्तावेज दिखाकर उन्हें डरा दिया।ठगों ने महिला को यकीन दिला दिया कि उनका फोन टैप किया जा रहा है और उन्होंने किसी को भी इस बारे में जानकारी दी, तो उनके मुंबई में रहने वाले बेटे और पोते को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसी डर के चलते महिला सात दिनों तक उनके चंगुल में फंसी रहीं।

7 दिनों तक घर से बाहर नहीं निकलीं रिटायर्ड प्रोफेसर ठगों ने रिटायर्ड प्रोफेसर के वॉट्सऐप पर सुप्रीम कोर्ट का फर्जी वारंट भेजकर गिरफ्तारी का खौफ पैदा कर दिया। उन्होंने महिला को यह कहकर डराया कि उनके घर के आसपास टीम तैनात है और बचने के लिए उन्हें हर निर्देश मानना होगा। इसी साइकोलॉजिकल प्रेशर के कारण महिला ने एक हफ्ते तक न तो बेटे को कुछ बताया और न ही पुलिस को सूचना दी।

इस दौरान महिला ने किश्तों में ठगों के बताए खातों में कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए ट्रांसफर किए। उन्होंने 21 अप्रैल को 20 लाख, 22 अप्रैल को 34.20 लाख, 23 अप्रैल को 15.20 लाख और 24 अप्रैल को 35.40 लाख रुपए जमा कराए। महिला इतनी डरी हुई थी कि गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी जमापूंजी ठगों के हवाले करती रही।

तकनीकी जांच से खुला नेटवर्क का राज सिटी कोतवाली व रेंज थाना के प्रभारी सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस की साइबर टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबर्स एवं डिजिटल ट्रांजेक्शन का तकनीकी जांच कर बारीकी से विश्लेषण किया, जिसकी जांच में पता चला कि ठगी की रकम कई लेयर बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। जिसके बाद बैंकिंग ट्रेल एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस की टीम राजस्थान भेजा गया, जहां चुरू जिले से दो आरोपियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया। पकड़े गए आरोपियों में चुरु जिले के रतननगर थाना क्षेत्र के ग्राम पोती निवासी रूपेन्द्र सिंह पिता संपत सिंह (21) और विशाल सिंह (20) पिता जीवराज सिंह शामिल हैं।

कमीशन के लालच में बने आरोपी पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे और ठगी की रकम निकालकर गैंग के अन्य सदस्यों तक पहुंचाई थी। आरोपियों को इसके बदले कमीशन राशि दी गई थी। आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन एवं अन्य दस्तावेज जप्त किए गए हैं।

अन्य आरोपियों की तलाश करने का दावा साइबर रेंज थाने की टीम इस मामले की जांच कर रही है। दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर बिलासपुर लाया गया है। साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, बैंक खातों एवं डिजिटल ट्रेल की विस्तृत जांच जारी है। सीएसपी गगन कुमार का दावा है कि इस गैंग के अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। शीघ्र ही उनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी।

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