
अनिल टुटेजा को इस मामले में 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि वे 21 अप्रैल 2024 से ही न्यायिक हिरासत में थे। राज्य सरकार की ओर से 2019 के कुछ व्हाट्सएप मैसेज का हवाला देते हुए आरोपों की गंभीरता बताई गई।
वहीं, टुटेजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और मामले में 85 गवाहों की जांच होनी है, जिससे ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई पूरी होने और अंतिम फैसला आने में काफी समय लग सकता है। इसलिए मेरिट पर कोई टिप्पणी किए बिना पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत देना सही होगा।
मानत के साथ कड़ी शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने टुटेजा की पूर्व प्रभावशाली प्रशासनिक भूमिका को देखते हुए गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जताई। इसी कारण कोर्ट ने सख्त शर्त लगाई कि रिहाई के बाद वे छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे।
रिहाई के एक सप्ताह के भीतर उन्हें अपने निवास की पूरी जानकारी ACB और संबंधित पुलिस थाने को देनी होगी। साथ ही, उन्हें हर सुनवाई में अदालत में उपस्थित होना होगा, जब तक कि अदालत से विशेष छूट न मिले।