
इससे पहले रायगढ़ में ही करंट से बंदर के बच्चे की जान चली गई थी। जिसके बाद मां अपने बच्चे को गोद में लेकर घंटों भटकती रही। बच्चे को सीने से लगाकर इधर-उधर घूमती रही। जिसे देखकर वहां मौजूद लोगों ने वीडियो बना लिया था।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
जानकारी के मुताबिक, छाल रेंज के एडू परिसर में 52 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। शनिवार रात हाथियों का दल जंगल से निकलकर आमागुड़ा-पुसल्दा तालाब के पास पहुंचा था। संभावना जताई जा रही है कि हाथियों का दल तालाब में नहाने और पानी पीने के लिए उतरा था। इसी दौरान एक बेबी एलीफेंट दलदल में फंस गया और बाहर नहीं निकल सका।
दलदल में फंसे रहने के कारण बेबी एलीफेंट की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बेबी एलीफेंट के बाहर नहीं निकलने पर हाथियों का झुंड पूरी रात तालाब के आसपास ही मौजूद रहा और चिंघाड़ता रहा। सुबह ग्रामीणों और हाथी ट्रैकर्स को घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई।
मृत शावक को उठाने की कोशिश करती रही मादा हाथी
घटना के दौरान एक भावुक कर देने वाला दृश्य भी सामने आया। एक मादा हाथी अपने मृत शावक को सूंड और पैरों की मदद से उठाने की कोशिश करती रही। ग्रामीणों ने दूर से इस घटना का वीडियो मोबाइल में रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
कुछ देर बाद हाथियों का दल वहां से जंगल की ओर चला गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मृत शावक को दलदल से बाहर निकाला और आगे की कार्रवाई शुरू की।
17 दिनों में 3 हाथी शावकों की मौत
धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज में पिछले 17 दिनों के भीतर 3 हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। पहली घटना 8 मई को सिंघीझाप क्षेत्र स्थित घोघरा डैम में हुई थी, जहां पानी में डूबने से करीब 6 महीने के हाथी शावक की मौत हो गई थी।
इसके बाद 11 मई को तरकेला गांव के केराझरिया जंगल स्थित डैम में दलदल में फंसने से एक अन्य शावक की जान चली गई। अब 24 मई को आमागुड़ा-पुसल्दा तालाब में तीसरे शावक का शव मिला है।
वन विभाग ने शुरू की आगे की प्रक्रिया
इस मामले में राजेश चौहान ने बताया कि, इलाके में 52 हाथियों का दल विचरण कर रहा था। मृत शावक को दलदल से बाहर निकाल लिया गया है और आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उन्होंने बताया कि हाथियों का दल रात में तालाब में नहाने और पानी पीने के लिए पहुंचा था।