
डॉक्टर दंपती लंबे समय से आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में लोगों का इलाज कर मानव सेवा का काम कर रहे हैं। उन्होंने अब तक 1 लाख से ज्यादा मरीजों का फ्री में इलाज किया है। उनके इस समर्पण और सेवा को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा है।
दंतेवाड़ा की बुधरी ताती को भी मिलेगा सम्मान
साल 2026 में देशभर की कुल 131 हस्तियों को पद्म पुरस्कार दिए जाने हैं। सोमवार को पहले चरण में 66 लोगों को सम्मानित किया गया है, जबकि बाकी 65 विजेताओं को अगले फेज में सम्मान मिलेगा।
हालांकि, दूसरे चरण की तारीखों का अभी ऐलान नहीं किया गया है। अगले फेज में समाज सेवा के क्षेत्र में काम करने वाली दंतेवाड़ा की बुधरी ताती को भी पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा।
बस्तर के ‘डॉक्टर भैया’ और ‘भाभी’
डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले दंतेवाड़ा के आदिवासी इलाके में पिछले 35 साल से नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। ये दोनों पति-पत्नी हैं। मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा के रहने वाले हैं। 1990 में बारसूर (दंतेवाड़ा) आकर बस गए।
तब से ये दक्षिण बस्तर, बीजापुर और सुकमा के वनवासी समुदाय की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। गोडबोले दंपती MAAS योजना के तहत बच्चों को कुपोषण और एनीमिया से बचाने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही दूर-दराज के गांवों में मेडिकल कैंप लगाते हैं। लगातार फॉलो-अप करते हैं।
मेरे सामने बैठा हर आदिवासी मेरे लिए भगवान- डॉ. रामचंद्र
डॉ. रामचंद्र जिन्हें लोग प्यार से ‘डॉक्टर भैया’ कहते हैं, अब तक 1 लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज कर चुके हैं। वहीं सुनीता गोडबोले आदिवासी महिलाओं के संगठन और स्वास्थ्य जागरूकता में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
साथ ही स्कूल के बच्चों को स्वास्थ्य शिक्षा और संस्कार भी देते हैं। डॉ. गोडबोले का कहना है कि मेरे सामने बैठा हर आदिवासी मेरे लिए भगवान है।