
वाहन मालिकों का आरोप है कि केवल एक एजेंट को ही बारकोड वाली रेडियम उपलब्ध कराने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा किसी अन्य एजेंट को न तो रेडियम लगाने की अनुमति है और न ही शासन की ओर से सप्लाई दी जा रही है। इसे लेकर मोनोपॉली सिंडिकेट पर सवाल उठने लगे हैं।
परिवहन विभाग के फिटनेस सेंटरों को लेकर वाहन मालिकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फिटनेस जांच के दौरान एक निजी कंपनी की रेडियम और बारकोड जबरन लगवाने का दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि कई वाहनों में पहले से मानक के अनुसार रेडियम लगा होने के बावजूद उसे अमान्य बताकर नया रेडियम लगवाने के लिए मजबूर किया जाता है।
वाहन मालिकों का कहना है कि नया रेडियम नहीं लगवाने पर फिटनेस प्रक्रिया में देरी की जाती है। इससे वाहन चालकों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
मनमानी वसूली को लेकर विरोध
परिवहन विभाग के ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर में मनमानी और अतिरिक्त वसूली को लेकर वाहन मालिकों और एजेंटों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बुधवार को बारकोड वाली रेडियम की कीमत बढ़ाने और सप्लाई को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ लोग शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम शिव बनर्जी ने फिटनेस सेंटर के जीएम को तलब किया है।
40 गाड़ियों का नहीं हो सका फिटनेस
फिटनेस सेंटर में पहले बारकोड वाली रेडियम 2 हजार रुपए में लगाई जा रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 2500 रुपए कर दिया गया है। स्थानीय एजेंटों का आरोप है कि रायपुर से केवल एक व्यक्ति को ही इसकी सप्लाई दी जा रही है, जबकि अन्य एजेंट उसी से रेडियम खरीदने को तैयार नहीं हैं।
विवाद के चलते बुधवार को केवल 2 गाड़ियों का ही फिटनेस हो सका, जबकि करीब 40 गाड़ियां बिना फिटनेस के वापस लौट गईं। इससे वाहन मालिकों और चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
छोटी-छोटी कमियों पर भी अतिरिक्त वसूली के आरोप
वाहन मालिकों ने फिटनेस सेंटर में अलग-अलग कारण बताकर अतिरिक्त रकम वसूलने का आरोप लगाया है। आरोप है कि विंडशील्ड में मामूली क्रेक होने पर 1000 रुपए, हाइवा का डाला ज्यादा मिलने पर 2000 रुपए, नंबर प्लेट गायब होने पर 1000 रुपए और इंडिकेटर-हेडलाइट खराब होने पर 500 रुपए लेकर गाड़ियों को पास किया जा रहा है।