गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के दूरस्थ आदिवासी ग्राम मेंढ़ुका में एक आंगनबाड़ी केंद्र का जर्जर छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया

Chhattisgarh Crimesगौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के दूरस्थ आदिवासी ग्राम मेंढ़ुका में एक आंगनबाड़ी केंद्र का जर्जर छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया। घटना के समय केंद्र के भीतर दर्जनों बच्चे मौजूद थे और पढ़ाई चल रही थी। गनीमत रही कि कोई बच्चा छज्जे की सीधी चपेट में नहीं आया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

छज्जा गिरते ही आंगनबाड़ी केंद्र में अफरा-तफरी मच गई। कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की मदद से बच्चों को तत्काल सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के बाद बच्चों और अभिभावकों में दहशत का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जिस स्थान पर छज्जा गिरा, उसके आसपास कुछ देर पहले तक बच्चे मौजूद थे। यदि हादसा कुछ मिनट पहले होता, तो गंभीर जनहानि हो सकती थी। घटना के बाद भवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कई बार दी गई थी जर्जर भवन की जानकारी

घटना की सूचना मिलते ही जनपद पंचायत मरवाही के उपाध्यक्ष अरविंद जायसवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने संबंधित विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।

जायसवाल ने बताया कि आंगनबाड़ी भवन की जर्जर स्थिति को लेकर विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद भवन की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

ग्रामीणों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग

हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि किसी बच्चे को नुकसान पहुंचता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। ग्रामीणों ने जर्जर भवनों का सर्वे कर तत्काल मरम्मत या नए भवनों की व्यवस्था करने की मांग की है।

अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों की सुरक्षा पर भी सवाल

मेंढ़ुका की घटना ने जिले के दूरस्थ इलाकों में संचालित अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। कई ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में ऐसे कई भवन हैं जो जर्जर हालत में संचालित हो रहे हैं और कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।

अब सभी की नजर महिला एवं बाल विकास विभाग पर है कि वह इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करता है या फिर मामला केवल जांच तक सीमित रह जाता है।

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