
रेरा की जांच में सामने आया कि कई प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों ने रहवासियों की सोसायटी या एसोसिएशन का गठन नहीं कराया। वहीं कई जगह पार्क, कम्युनिटी हॉल, ओपन स्पेस, सड़क, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य कॉमन सुविधाओं का हस्तांतरण भी नहीं किया गया।
नोटिस की कॉपी-
सिर्फ प्राइवेट बिल्डर ही नहीं, सरकारी एजेंसियां भी दायरे में
जानकारी के मुताबिक कार्रवाई की जद में केवल निजी बिल्डर ही नहीं हैं। नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड की कुछ आवासीय परियोजनाओं को लेकर भी नोटिस जारी किए गए हैं।
आखिर रहवासियों को क्या नुकसान?
किसी भी कॉलोनी या अपार्टमेंट प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद उसका प्रबंधन रहवासियों की सोसायटी को सौंपा जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर मेंटेनेंस, कॉमन सुविधाओं के उपयोग, फंड और प्रबंधन से जुड़े अधिकार रहवासियों को पूरी तरह नहीं मिल पाते।
15 दिन में देना होगा जवाब
रेरा ने सभी प्रमोटरों से 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। यदि जवाब नहीं मिला या संतोषजनक नहीं पाया गया तो रेरा अधिनियम 2016 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खरीदारों की भी जिम्मेदारी
रेरा ने यह भी कहा है कि केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि फ्लैट और मकान खरीदने वालों की भी जिम्मेदारी है। उन्हें सोसायटी या एसोसिएशन के गठन में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, ताकि प्रोजेक्ट का संचालन और रखरखाव व्यवस्थित तरीके से हो सके।