
अजगल्ले पर एक पीड़ित महिला से कोर्ट में चालान पेश करने के लिए 5 हजार रुपए की मांग करने का आरोप है। इसके साथ ही अजगल्ले ने पीड़िता को धमकी दी कि ‘फोन रिकॉर्डिंग कर रहे हो, तुम लोगों को देख लूंगा।’
पुलिस को प्रधान आरक्षक के खिलाफ लिखित शिकायत और ऑडियो सबूत मिले थे। जिसके बाद कार्रवाई की गई।
प्रधान आरक्षक ने पहले 7 हजार लिए
पीड़ित महिला ने बताया कि उसकी बहू उसे फोन पर धमकी दे रही थी कि उन्होंने उसके पति को भगा दिया है और झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी।
इस मामले को लेकर महिला 14 अगस्त को अपनी बेटी के साथ ग्राम करही में बहू के पास गई थी। वहां दोनों पक्षों के बीच विवाद और मारपीट हुई।
महिला ने बिर्रा थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप है कि प्रधान आरक्षक अनिल सिंह अजगल्ले ने उनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर लिए और उनके द्वारा लिखे आवेदन को स्वीकार नहीं किया।
इसके बजाय, उन्होंने एक हस्ताक्षरित कागज पर कुछ लिखा, जिसकी एक प्रति महिला को दी। रिपोर्ट दर्ज करने के लिए प्रधान आरक्षक ने पहले 7 हजार रुपए लिए और कहा कि यदि कोई और जानकारी होगी तो फोन पर बताएंगे।
धमकी दी, कहा- देख लूंगा
महिला के अनुसार, 19 नवंबर को प्रधान आरक्षक अजगल्ले ने उनकी बेटी को लगातार फोन किया और शेष 5 हजार रुपए की राशि किसी अन्य व्यक्ति के खाते में फोन-पे करने को कहा।
जब महिला ने गरीबी का हवाला देते हुए पैसे देने में असमर्थता जताई, तो प्रधान आरक्षक ने धमकी दी कि “फोन रिकॉर्डिंग कर रहे हो, तुम लोगों को देख लूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि पैसे न देने पर चालान न्यायालय में पेश नहीं किया जाएगा।
बाद में चालान को एक अन्य पुलिसकर्मी के साथ भेजा गया, जिसने कहा कि चालान की डायरी में ‘स्क्रूटनी’ (जांच) करनी है और उसे वापस बिर्रा थाना ले गया। प्रधान आरक्षक ने महिला को 20 नवंबर को चांपा न्यायालय आने को कहा था, जहां से जमानत मिलने की बात कही गई थी।
एसपी विजय कुमार पाण्डेय से लिखित शिकायत के बाद एसडीओपी यदुमणि सिदार को मामले की प्राथमिक जांच करने के निर्देश दिए। पुलिस की छवि धूमिल करने पर प्रधान आरक्षक अनिल सिंह अजगल्ले को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया है। साथ ही उसके खिलाफ प्राथमिक जांच के निर्देश दिए है।