
कॉलेज में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2020-21 से ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन की खरीदी और इसके मान्यता को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई थी। कॉलेज प्रबंधन ने पूर्व में ही लगभग 45 लाख रुपए की लागत से मशीन की खरीदी कर ली, लेकिन ब्लड कम्पोनेंट सेपरेशन की अनुमति नहीं मिल पाई थी।
लंबे इंतजार के बाद मिली अनुमति
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने लगातार शासन से पत्राचार करने के साथ ही अन्य प्रक्रिया की पूर्ति की। लंबे इंतजार के बाद 23 दिसंबर की शाम खाद्य एवं औषधि प्रशासन छग द्वारा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हॉस्पिटल में स्थित ब्लड सेंटर को ब्लड सेपरेशन के लिए आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
जारी एंडोर्समेंट लेटर के अनुसार वर्तमान में सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला अस्पताल अंबिकापुर के नाम से संचालित ब्लड सेंटर को यह अनुमति दी गई है।
एक यूनिट से चार मरीजों को होगा फायदा
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में साल भर ब्लड की कमी बनी रहती है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की व्यवस्था नहीं होने से एक यूनिट ब्लड के घटकों को अलग नहीं किया जा सकता था।
अब ब्लड के पैक्ड रेड सेल, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, आईपी, प्लेटलेट कांसन्ट्रेट व क्रायोफ्रेसीविटेट में विभक्त किया जा सकता है। इस तरह एक यूनिट ब्लड का कई मरीजों को जरूरत के अनुसार प्रदान किया जाएगा।
सभी मशीनों की पहले ही खरीदी
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन हेतु कंपोनेंट सेपरेटर मशीनों की खरीदी पहले हो चुकी है। लगभग 45 लाख रुपए खर्च कर मशीन खरीदने के साथ ही ब्लड बैंक के टेक्नीशियन को इसकी ट्रेनिंग दी गई थी।
इसके साथ ही फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा व अन्य कंपोनेंट को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 40 डिग्री व माइनस 80 डिग्री वाले फ्रीजर उपलब्ध हैं। इसमें कंपोनेंट को 3 सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। अब मशीनों लैब का लेआउट होने व अन्य कार्य के बाद जनवरी के महीने में मशीनों को चालू कर दिया जाएगा।
संभाग के लिए बड़ी उपलब्धि
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के सीएस डा. आरसी आर्या ने कहा कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर की अनुमति मिली है। यह सरगुजा संभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धी है। हमारे पास मशीनें पहले से उपलब्ध हैं और जनवरी महीने तक मशीनों को शुरू किया जा सकेगा।