
फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने मनेंद्रगढ़ विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात कर घटना की जानकारी दी। इस दौरान मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मामले को लेकर सरगुजा कमिश्नर से बात की है।
विपक्ष ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया
वहीं, विपक्ष इस मुद्दे पर शासन-प्रशासन पर हमलावर है। कांग्रेस के पूर्व विधायक और छत्तीसगढ़ ट्रेड यूनियन काउंसिल के प्रांताध्यक्ष गुलाब कमरों ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा कि यह निलंबन नहीं, बल्कि सत्ता का दुरुपयोग है और जिला प्रशासन खुद को सरकार से ऊपर समझ रहा है।
गुलाब कमरों ने रायपुर स्थित इंद्रावती भवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हड़ताल के दौरान पूरा कामकाज ठप रहा था। किसी भी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं दिया गया, और वे स्वयं वहां उपस्थित थे, फिर भी उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। इसके बावजूद, कहीं भी इस तरह की दमनात्मक कार्रवाई नहीं हुई थी।
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों से समर्थन मांगने पर हुई थी कार्रवाई
दरअसल, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के तीन पदाधिकारी अपनी तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान कलेक्टर कार्यालय में कर्मचारियों से हड़ताल का समर्थन मांगने गए थे। इसकी जानकारी मिलने पर कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने पुलिस बुलाकर तीन शासकीय कर्मचारियों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की।
इसके साथ ही, कार्य में बाधा का हवाला देते हुए शिक्षक गोपाल सिंह, सफाई कर्मचारी सुरेंद्र प्रसाद और राजस्व निरीक्षक संजय पाण्डेय को बिना किसी पूर्व नोटिस और सुनवाई के तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने निलंबन आदेश को तत्काल वापस लेने और कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दमनात्मक कार्रवाई जारी रही, तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।