
बीजापुर में माओवादियों की मौजूदगी की इनपुट मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने अभियान शुरू किया। डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) की टीम नक्सल विरोधी ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान शनिवार तड़के नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी।
सुबह करीब 5 बजे से माओवादियों के साथ रुक-रुककर मुठभेड़ चल रही है। सर्च ऑपरेशन के दौरान मुठभेड़ स्थल से अब तक दो नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। मुठभेड़ की पुष्टि एसपी जितेंद्र यादव ने की है।
सुरक्षा कारणों के चलते मुठभेड़ के सटीक स्थान और ऑपरेशन में शामिल सुरक्षाबलों की संख्या सार्वजनिक नहीं की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन पूरा होने के बाद जानकारी आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।
8 दिन पहले 1 करोड़ का इनामी नक्सली लीडर गणेश ढेर
25 दिसंबर छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा के कंधमाल में सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में 6 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें 1 करोड़ से ज्यादा का इनामी सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) गणेश उईके (69) भी शामिल है। दो महिला नक्सली भी मारी गई। मारे गए नक्सलियों के शव और हथियार बरामद किए गए थे।
सुरक्षाबलों को कंधमाल जिले के चाकापाड़ इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी का इनपुट मिला था। इसी इनपुट के आधार पर 23 टीमों को ऑपरेशन के लिए भेजा गया। इनमें 20 स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG), दो सीआरपीएफ और एक बीएसएफ टीमें शामिल थीं। यह ऑपरेशन कंधमाल जिले के चाकापाड़ थाना क्षेत्र और गंजाम जिले के राम्भा वन क्षेत्र में चलाया गया।
25 दिसंबर को अभियान के दौरान अलग-अलग लोकेशन पर माओवादियों और SOG जवानों के बीच कई बार गोलीबारी हुई। मुठभेड़ के बाद इलाके में सर्चिंग की गई, जिसमें 5 नक्सलियों के शव मिले। इनमें 4 पुरुष और 2 महिलाएं हैं। सभी माओवादी वर्दी में थे। मौके से 2 इंसास राइफल और एक 303 राइफल बरामद हुईं।
बस्तर में 200 से 300 नक्सली बचे
नक्सल संगठन में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 से 300 आर्म कैडर के नक्सली ही बचे हुए हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। नक्सलियों का महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह से खत्म हो गया है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है।
अब फोर्स के लिए इन 90 दिनों में दक्षिण बस्तर डिवीजन को नक्सल मुक्त करना ही सबसे बड़ी चुनौती है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर के जंगलों में ही पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में है।
कुछ समय पहले देवजी की लोकेशन तेलंगाना-आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन में थी। हालांकि, वह बार-बार ठिकाने बदल रहा है। इन 90 दिनों में अगर ये 5 से 6 बड़े नक्सली मारे जाते हैं या सरेंडर करते हैं तो बस्तर के फ्रंट लाइन के सभी टॉप लीडर्स खत्म हो जाएंगे।