राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में महिला की इलाज में लापरवाही से हुई मौत के मामले में 5 लाख मुआवजा परिजनों को देने के निर्देश दिए

Chhattisgarh Crimesराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में महिला की इलाज में लापरवाही से हुई मौत के मामले में 5 लाख मुआवजा परिजनों को देने के निर्देश दिए हैं। डेढ़ साल पहले 55 वर्षीय महिला की इलाज में लापरवाही के कारण मौत हो गई थी। मामले की शिकायत भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की थी।

जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर के दर्रीपारा निवासी आदिवासी महिला शांति मरावी (55) की 28 जुलाई 2024 को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में मौत हो गई थी। परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया था। मौत से तीन दिन पहले महिला हॉस्पिटल पहुंची थी, लेकिन डॉक्टर ने उसे भर्ती करने के बजाय सिर्फ दवा देकर घर भेज दिया।

दूसरे दिन महिला को फिर से हॉस्पिटल लाया गया, लेकिन डॉक्टर ने उसे भर्ती नहीं किया। तीसरे दिन हालत बिगड़ने पर महिला को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। कुछ घंटे बाद ही महिला की मौत हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने हंगामा भी किया था।

शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने की कार्रवाई

इस मामले में भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत करते हुए इलाज में लापरवाही के कारण महिला की मौत होने का हवाला देते हुए जांच की मांग की थी। मानवाधिकार आयोग ने मामले को संज्ञान में लिया। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक सरगुजा से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।

कलेक्टर ने 15 जनवरी 2025 को रिपोर्ट पेश किया। रिपोर्ट से ऐसा प्रतीत होता है कि शांति मरावी के इलाज के संबंध में अपनी लापरवाही के लिए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्स के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

सीएमएचओ अंबिकापुर की जांच रिपोर्ट भी आयोग को भेजी गई थी। आयोग ने रिपोर्ट की कॉपी भेजी और 07 अक्टूबर 2025 को कार्रवाई के तहत शिकायतकर्ता आलोक दुबे से टिप्पणियां मांगी।

डॉक्टरों की लापरवाही, लेकिन जांच में बचाया गया

आलोक दुबे ने अपना पक्ष मानवाधिकार आयोग को भेजते हुए बताया कि, मामले में चिकित्सकों ने लापरवाही की थी। उन्हें बचाते हुए सीएमएचओ ने सिर्फ नर्सिंग और ट्रेनी डॉक्टरों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति की है। आलोक दुबे ने दोषी कर्मचारियों को दी गई सज़ा की प्रकृति पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। आयोग ने उक्त तथ्यों की जांच की और मामले की सुनवाई पूरी की।

परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले में माना कि मृतक पीड़िता एक अनुसूचित जनजाति की महिला थी, जिसकी मौत सरकारी अस्पताल में मेडिकल स्टाफ की लापरवाही से हुई थी। आयोग इसे एक उचित मामला मानता है। सरकार को मृतक पीड़िता के परिजनों को मौद्रिक मुआवज़ा देना चाहिए।

आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को को निर्देश दिया है कि वे मृतक पीड़िता के परिजनों को पांच लाख रुपए का मुआवजा का भुगतान कराएं। भुगतान के सबूत की कापी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजा दो सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से भेजा जाए।

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