
सरगुजा जिले में धान उपार्जन और मिलिंग में गड़बड़ी के मामले में एक राइस मिल को सील कर दिया गया है। लखनपुर स्थित जगदंबा राइस मिल में की गई जांच के दौरान राइस मिल से 80 लाख रुपए का धान गायब मिला।
गायब धान को फिर से समर्थन मूल्य में खरीदी के लिए बेचे जाने की आशंका है। सरगुजा जिले में यह राइस मिलों पर की गई दूसरी कार्रवाई है। इसके पहले अंबिकापुर के शिवम फूड प्रोडक्ट्स के राइस मिल पर कार्रवाई की गई थी।
जानकारी के मुताबिक, लखनपुर तहसीलदार अंकिता पटेल, नायब तहसीलदार एवं खाद्य निरीक्षक के संयुक्त टीम ने लखनपुर के जगदंबा राइस मिल में छापा मारा। जांच में पता चला कि, राइस मिल ने रिकार्ड में समितियों से कुल 13,480 क्विंटल धान उठाव दिखाया।
मौके पर किए गए भौतिक सत्यापन में केवल 10,880 क्विंटल धान ही उपलब्ध पाया गया। राइस मिल में कुल 2,600 क्विंटल धान कम पाया गया, जिसकी कीमत 80 लाख रुपए से अधिक है।
सील किया गया राइस मिल, होगी जांच
प्रशासनिक अमले ने जगदंबा राइस मिल को सील कर दिया गया है। प्रशासन मामले की विस्तृत जांच कर रही है। राइस मिल के संचालक हरविंद अग्रवाल हैं, जो राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे निरीक्षण और जांच अभियान निरंतर जारी रहेंगे।
सरगुजा जिले में राइस मिलर्स पर दूसरी कार्रवाई
सरगुजा जिले में राइस मिलों पर की गई यह दूसरी कार्रवाई है। इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को मेसर्स शिवम फूड प्रोडक्ट, कंठी स्थित राइस मिल की जांच की गई थी, जिसमें एक करोड़ 22 लाख कीमत का 3946 क्विंटल धान कम पाया गया था। राइस मिल ने 11,880 क्विंटल धान का उठाव करना बताया, जबकि भौतिक सत्यापन में 9,867 बोरी धान कम मिला।
निरीक्षण के दौरान मिलिंग काम और मशीन बंद पाई गई। स्टॉक संबंधी अभिलेख एवं दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए। इस मामले में छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016 की कंडिका 4(3), 4(5), 6(1) एवं 6(3) का उल्लंघन पाया गया है, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण पेश किया गया है।
फिर से खरीदी में खपाया जा रहा धान
राइस मिलरों की तरफ से धान को फिर से समर्थन मूल्य में खरीदी में खपाए जाने की आशंका है। राइस मिलरों कागजों में ही धान का उठाव कर लेते हैं, जिससे समितियों में धान को बिचौलियों और दूसरे किसानों के नाम पर चढ़ा दिया जाता है। इसके अलावा राइस मिलर्स के उठाए गए धान को राइस मिलों के बजाय बिचौलियों को दे दिया जाता है, जो समितियों में धान का खपाते हैं।
तक 10 प्रतिशत उठाव, खरीदी हो सकती है प्रभावित
इस साल कस्टम मिलिंग में राइस मिलरों ने रुचि नहीं दिखाई है। राइस मिलरों अब तक समितियों से मात्र 10 प्रतिशत धान का उठाव किया गया है, जिसके कारण कई समितियों में धान रखने की जगह नहीं बची है और धान खरीदी प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।