
रिपोर्ट के आधार पर पार्टी का कहना है कि विवाद के दौरान महिला पुलिसकर्मी के साथ ही नहीं ग्रामीण महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया, आप ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल ग्रामीण महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा किए गए अमानवीय व्यवहार को जानबूझकर दबाया जा रहा है। गांव की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनकी साड़ियां फाड़ी गईं, उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, लेकिन इन घटनाओं के वीडियो सामने नहीं लाए गए।
फर्जी जनसुनवाई से भड़का ग्रामीणों का गुस्सा AAP की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता प्रियंका शुक्ला के नेतृत्व में गठित जांच समिति ने कहा कि तमनार की हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी शुरुआत एक फर्जी जनसुनवाई से हुई थी। पार्टी का आरोप है कि यह जनसुनवाई उद्योगपति और बीजेपी नेता नवीन जिंदल को फायदा पहुंचाने के लिए की गई। जिस जनसुनवाई की बात की जा रही है, उसमें गांव के महज 12 से 15 लोग शामिल थे, जिन्हें जिंदल समर्थक बताया जा रहा है। इसकी सूचना भी केवल चार दिन पहले दी गई, जिससे स्पष्ट है कि स्थानीय ग्रामीणों को जानबूझकर प्रक्रिया से दूर रखा गया।
जैसे ही ग्रामीणों को जनसुनवाई की जानकारी मिली, उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध के बीच 11 दिसंबर 2025 से CHP चौक पर आर्थिक नाकेबंदी की गई। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने जनसुनवाई का स्थान बदल दिया, लेकिन इससे गुस्सा और बढ़ गया। ग्रामीणों का कहना था कि अगर उनकी जल, जंगल और जमीन छीनी गई तो वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।
महिला टीआई के साथ ही ग्रामीण महिलाओं से भी हुई बदसलूकी
27 दिसंबर को हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए, जब महिला टीआई के नेतृत्व में जिंदल की कोयला लदी गाड़ियों को जबरन पास कराने की कोशिश की गई। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने करीब 50 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसी दौरान एक कोयला ट्रक की टक्कर से 70 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। खबर फैली कि उनकी मौत हो गई है, जिससे माहौल और भड़क उठा। बाद में गांव वालों ने जांच समिति को बताया कि बुजुर्ग की 4 जनवरी 2026 को मौत हो चुकी है, लेकिन इस मामले पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई या चर्चा नहीं की जा रही।