छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी में तपती धूप के बीच सेव (सेब) की खेती करना किसी चुनौतीपूर्ण से कम नहीं

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी में तपती धूप के बीच सेव (सेब) की खेती करना किसी चुनौतीपूर्ण से कम नहीं है। क्योंकि, इसकी खेती ठंड प्रदेशों में ठंड के समय की जाती है। लेकिन, बिलासपुर के युवा किसान कपिल कश्यप ने अपने नवाचार और फसल चक्रपरिवर्तन की दृढ़निष्ठा, मेहनत, नई तकनीक और सोच से यह संभव कर दिखाया है।

शहर से लगे ग्राम ढेका के किसान की उगाई सेव को देख लोग भी हैरान है, जिसे देखने के लिए आसपास के किसान भी पहुंच रहे हैं। अप्रैल महीने की गर्मी में तापमान जहां 43 डिग्री के पार चला गया है। वहीं, इसी तपती जमीन पर ढेका का किसान कपिल कश्यप सेव फल की खेती कर रहा है।

वह परंपरागत खेती की सोच से अलग कुछ नया करने की योजना बनाई। जिसके बाद उन्होंने अपनी खेत में गर्म जलवायु के बाद भी सेव की खेती करने का सफल प्रयोग किया है।

बिलासपुर में सेब की खेती की संभावनाएं

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बिलासपुर में सेव की खेती आम नहीं है, लेकिन अगर आप कोशिश करना चाहते हैं तो आपको विशेषज्ञों की सलाह लेनी चाहिए और उपयुक्त किस्मों का चयन करना चाहिए।

जैसे कपिल कश्यप ने किया है। इसके लिए कुछ उन्नत किस्में जैसे कि रेड चीफ, आर्गन स्पर, समर रेड, सिल्वर स्पर, स्टार स्पर रेड आदि हैं जो थोड़ी गर्मी सहन कर सकती हैं।

सेव के खास किस्म के मंगाए पौधे

कपिल बताते हैं कि सेब ठंडे मौसम में पैदा होने वाला फल है। इसके पौधों के विकास के लिए ठंडे तापमान की आवश्यकता होती है। लेकिन, उन्होंने अपनी जमीन के अनुरूप सेव की खेती की योजना बनाई, जिसके लिए रायपुर से खास किस्म के पौधे मंगवाए, इसकी खासियत यह है कि पौधे गर्मी सहन करने की क्षमता रखते हैं।

हालांकि, नर्सरी में नमी बनाए रखने के तरीके अपनाए। जिसके लिए उन्होंने ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग तकनीक अपनाकर मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए उपयोग किया।

20 पौधे लगाकर किया प्रयोग, अब लगाएंगे 100 पौधे

कपिल कश्यप ने बताया कि प्रयोग के तौर पर उन्होंने अभी केवल 20 पौधे मंगाए थे, जिसके लिए पहले नर्सरी तैयारी किया। इसमें ज्यादातर पौधे उग गए हैं और फलदार होने की स्थिति में है।

महज साल भर पहले उन्होंने नर्सरी तैयार किया था, जिसमें तीन पेड़ तैयार पूरी तरह से फल देने लगा है। पौधे में फल को देखकर उन्हें सफलता की उम्मीद नजर आ रही है। लिहाजा, अब 100 पेड़ मंगाकर नर्सरी तैयार करने की योजना है।

पौधों पर लगे फल, देखने के लिए पहुंच रहे किसान

कपिल के इस प्रयोग ने आसपास इलाके में उत्सुकता जगा दी है। आसपास के गांव के किसान उनकी नर्सरी देखने के लिए पहुंच रहे हैं। भीषण गर्मी में पौधों पर लगे सेव के छोटे-छोटे फलों को देखकर हैरान हैं। इसे अब कई युवा किसान एक नई उम्मीद की तरह देख रहे हैं।

कृषि वैज्ञानिक बोले- नई किस्म और तकनीक किसानों के लिए लाभदायक

कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के प्रमुख वैज्ञानिक ने डॉ. संजय कुमार वर्मा कहा कि गर्मी में सेब उगाकर कपिल कश्यप ने फसल चक्र परिवर्तन की बुनियाद रख दी है। उनका यह प्रयोग बेहद खास है।

यह दूसरे किसानों के लिए भी लाभदायक हो सकती है। छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए यह एक प्रेरणा है, जो जलवायु के विपरीत नई फसल के साथ उन्नत खेती के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं।

ठंड प्रदेशों में होती है सेव की पैदावार

सेव की खेती आमतौर पर ठंडे और शीतोष्ण क्षेत्रों में की जाती है। सेब के पौधों को अच्छी वृद्धि के लिए अधिक ठंड की आवश्यकता होती है, और उन्हें एक साल में 400 घंटे 10 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान की आवश्यकता होती है।

जानिए सेव की नर्सरी लगाने से पहले की तैयारी

  • सेव की ऐसी किस्मों का चयन करें जो गर्मी को सहन कर सकती हों और आपके क्षेत्र के लिए उपयुक्त हों।
  • मिट्टी को अच्छी तरह से तैयार करें और उसमें आवश्यक पोषक तत्वों को मिलाएं।
  • नर्सरी के लिए ऐसी जगह चुनें जो धूप से बचाव कर सके और हवा का संचार अच्छा हो।