देशभर में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट्स को अनिवार्य कर दिया गया है। जिसके चलते चॉइस सेंटर्स के लिए यह पैसे कमाने का जरिया बन चुका है। शहर में टू व्हीलर गाड़ियों के लिए चॉइस सेंटर्स डबल तक चार्ज कर रहे हैं। टू व्हीलर्स के लिए जहां अधिकारिक तौर पर 365 रुपए लिए जा रहे हैं। वहीं, चॉइस सेंटर्स इसके लिए 800 रुपए तक चार्ज ले रहे हैं।
वाहन मालिक हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिए परिवहन विभाग के cg transport. gov. in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। इसके लिए उन्हें केवल अपने आरसी की जरूरत पड़ेगा। आवेदन में अपना गाड़ी का रजिस्टर्ड नंबर, इंजन नंबर और चेचिस नंबर ही डालना होगा। उसके मोबाइल पर ओटीपी प्राप्त होगी उसे सबमिट करना होगा।
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) लगाने के लिए सख्ती शुरू होते ही फर्जी तरीके से इसे बनाने वाले भी सक्रिय हो गए हैं। रायपुर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी दुकान खुल गई है। जहां 1000 रुपए लेकर गोपनीय तरीके से इसे बनाया जा रहा है। बिना आरसी केवल आधार कॉर्ड के जरिए अनाधिकृत रूप से इसका निर्माण किया जा रहा है। हालांकि इसमें ओरिजनल नंबर प्लेट की तहत वॉटरमार्क नहीं है लेकिन, प्रथम दृष्टया इसकी पहचान तक नहीं हो पाती है।
अनाधिकृत रूप से नकली हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) समान दिखने वाली नकली प्लेट, स्मार्ट नंबर प्लेट, होलोग्राम, इंडिया मार्क, इंडिया शिलालेख लगाया जाना प्रतिबंधित है। रजिस्ट्रीकरण चिन्ह (एचएसआरपी) की बिक्री और आपूर्ति करने वाले डीलर, व्यक्तियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। साथ ही इसे बनवाने वाले के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
अवैध रूप से एचएसआरपी लगाने और इसका आवेदन करने पर निर्धारित शुल्क से अधिक लिए जाने की शिकायत परिवहन विभाग में कर सकते हैं। अनुबंधित कंपनी द्वारा शिविर लगाकर लगातार नंबर प्लेट के आवेदन और इसे बनाने के बाद वाहनों में फिड किया जा रहा है। इसका भुगतान केवल डिजिटल मोड के माध्यम से लिया जा रहा है।
एचएसआरसी नंबर प्लेट लगाने वाहन मालिक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए अधिकृत कंपनी और परिवहन विभाग द्वारा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जहां बिना अतिरिक्त शुल्क दिए नंबर प्लेट लगाए जा रहे हैं। वसूली करने की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश विभागीय अमले को दिए गए हैं। – डी रविशंकर, अतिरिक्त परिवहन आयुक्त