नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट का प्रदेश दौरा न करना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट का प्रदेश दौरा न करना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पूर्व सांसद और रायपुर दक्षिण के विधायक सुनील सोनी ने इस पर तंज कसते हुए कहा, पायलट का हवाई जहाज बिगड़ गया है और अब वे यहां आकर करेंगे क्या? नगरीय निकाय में सुपड़ा साफ हो गया।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी यही हाल हुआ। उनको अच्छे से मालूम है कि कांग्रेस यहां बुरी तरह से बिखर गई है। उनका कहीं रोल नहीं है।

कांग्रेस में गुटबाजी के आरोप

सुनील सोनी ने आगे कहा कि प्रदेश में कांग्रेस कई धड़ों में बंट चुकी है। एक तरफ भूपेश बघेल की कांग्रेस, एक तरफ टीएस सिंहदेव की कांग्रेस, एक तरफ चरणदास महंत की कांग्रेस, एक तरफ दीपक बैज की कांग्रेस है।

उन्होंने कहा कांग्रेस का कार्यकर्ता तक नहीं समझ पा रहा है कि कांग्रेस है कहां। वो भी ढूंढ रहा है, जनता तो दूर हो गई है और अब कार्यकर्ता भी दूर हो रहे हैं।

कार्यकारिणी बैठक में भी नहीं आए सचिन पायलट

हाल ही में प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी बैठक हुई थी, जिसमें दोनों प्रभारी सचिव विजय जांगिड़ और जरिता लैतफलांग तो शामिल हुईं, लेकिन प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट नदारद रहे। इससे पहले वे 26 जनवरी को प्रत्याशियों के ऐलान से पहले हुई बैठक के लिए रायपुर आए थे।

पीसीसी अध्यक्ष बोले पायलट बिजी

इस बीच, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, भारतीय जनता पार्टी वर्तमान मुद्दों पर तो बात कर नहीं रही है।

सचिन पायलट हमारे प्रभारी हैं और पार्टी के लिए लगातार मार्गदर्शन देते आए हैं और संगठन के लिए काम कर रहे हैं। वे 6 साल राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें संगठन के कामकाज की पूरी जानकारी है।

उन्होंने आगे कहा, हमारी लगातार उनसे चर्चा होती है और वर्तमान में उनके राज्य में भी विधानसभा सत्र चल रहा है, जिसकी वजह से वे व्यस्त हैं। वे जल्द छत्तीसगढ़ आएंगे या फिर हम दिल्ली जाकर उनसे मुलाकात करेंगे।

बहरहाल, नगरीय निकाय चुनाव में हार और प्रदेश प्रभारी की अनुपस्थिति ने कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।

 

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